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कबीर के राम पर दोहे | Kabir Dohe on Ram

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Table of Contents

कबीर के राम पर दोहे लिखने की कथा :Why Kabir started Writing Dohe on Ram

कबीर के दौर में काशी में रामानंद प्रसिद्ध पंडित और विद्वान व्यक्ति थे, कबीर ने कई बार रामानंद से मिलने और उन्हें अपना शिष्य बनाने की विनती कि लेकिन रामानंद सभी हिन्दू जाति वालों को शिष्य बनाते थे परन्तु शायद इनके मुसलमान जुलाहा होने के कारण उन्होंने इन्हे कुछ समय इनकी परीक्षा ली और इन्हे अपने शिष्य बनाने से बचते रहे। इसलिए हर बार उन्हें आश्रम से भगा दिया जाता था।

एक दिन कबीर ने गुरु रामानंद से मिलने की तरकीब लगायी। रामानंद रोज सुबह जल्दी 4 बजे गंगा स्नान करने घाट पर जाया करते थे, एक दिन कबीर उनके रास्ते में लेट गये

कबीर के इष्ट राम थे: Kabeer a Devotee of Ram wrote Dohe on him

एक दिन कबीर ने गुरु रामानंद से मिलने की तरकीब लगायी। रामानंद रोज सुबह जल्दी 4 बजे गंगा स्नान करने घाट पर जाया करते थे, एक दिन कबीर उनके रास्ते में लेट गये। जैसे ही रामानंद उस रास्ते से निकले उनका पैर कबीर पर पड़ा।बालक कबीर को देखकर अचानक से उनके मुंह से निकल पड़ा “राम-राम”, अपने गुरु रामानंद को प्रत्यक्ष देखकर कबीर बेहद खुश हुए और कबीर को राम-राम नाम का गुरु मन्त्र मिल गया। रामानंद कबीर की श्रद्धा को देखकर अत्यंत प्रसन्न होकर उन्हें अपना शिष्य बना लिया।

Kabir devised a plan to meet Guru Ramanand. Ramanand used to go to take bath on Ganga ghat in early morning in dark. Kabir layed under a step and hid himself. When Ramanand came on that way, he steeped on Kabir. Realising his mistake, he uttered “Ram-Ram” in surprise. Kabir took this Ram Ram as his Guru Mantra and became a disciple of Ramananda.

कबीर के राम नाम स्मरण पर दोहे: Kabir ke Ram Naam Smaran Par Dohe

राम नाम सुमिरन करै, सदगुरु पद निज ध्यान
आतम पूजा जीव दया लहै सो मुक्ति अमान।

Ram nam sumiran karai ,sadguru pad nij dhyan
Aatam puja jeev daya lahai so mukti aman .

भावार्थ: जो राम का सुमिरन और सदगुरु के चरणों का ध्यान करता है,जो आत्मा से ईश्वर की पूजा करता और जीवों पर दया भाव रखता है-उसे निश्चय हीं मुक्ति प्राप्त होती है।

Meaning: One who remembers Ram,keep in mind the lotus feet of guru. One who worships in soul , kind to creatures is sure to get salvation.

कबीर माया पापणीं, हरि सूँ करे हराम।
मुखि कड़ियाली कुमति की, कहण न देई राम॥

Kabeer maaya paapaneen, hari soon kare haraam.
Mukhi kadiyaalee kumati kee, kahan na deee Raam.

भावार्थ: यह माया बड़ी पापिन है। यह प्राणियों को परमात्मा से विमुख कर देती है तथा उनके मुख पर दुर्बुद्धि की कुंडी लगा देती है और राम-नाम का जप नहीं करने देती।

सहकामी सुमिरन करै पाबै उत्तम धाम
निहकामी सुमिरन करै पाबै अबिचल राम।

Sahkami sumiran karai pabai uttam dham
Nihkami sumiran karai pabai abichal Ram .

भावार्थ: जो फल की आकांक्षा से प्रभु का स्मरण करता है उसे अति उत्तम फल प्राप्त होता है। जो किसी इच्छा या आकांक्षा के बिना प्रभु का स्मरण करता है उसे आत्म साक्षातकार का लाभ मिलता है।

Meaning: One who remembers God for fruit gets very good result. One who remembers without any desire gets self realisation .

राम नाम की लूट है, लूट सके सो लूट
अंत काल पछतायेगा, जब प्रान जायेगा छूट।

Ram nam ki loot hai ,loot sakai so loot
Aant kal pachhtayega ,jab pran jayega chhoot .

भावार्थ: ईश्वर का भजन अत्यंत सुगम है। राम नाम जितना लूटा जाये-हमें अवश्य लूटना चाहिये। मृत्यु के समय राम नाम नहीं ले पाने से अत्यंत दुख होगा।

Meaning: There is loot for the name of Ram , you plunder as much as you can. You will repent at the last moment ,when the life will vanish .

कबीर के राम के प्रति सेवा भाव में दोहे: Kabir Ke Ram Ke Prati Seva Bhav Par dohe

कबीर कुत्ता राम का, मुतिया मेरा नाऊँ।
गलै राम की जेवड़ी, जित खैंचे तित जाऊँ॥

Kabeer kutta Raam ka, Motiya mera naoon.
Galai Raam kee jevadee, jit khainche tit jaoon.

भावार्थ: कबीर कहते हैं कि मैं तो राम का कुत्ता हूँ, और नाम मेरा मोती है। मेरे गले में राम की ज़ंजीर पड़ी हुई है, मैं उधर ही चला जाता हूँ जिधर वह ले जाते हैं। प्रेम के ऐसे बंधन में मौज-ही-मौज है।

इसी को इस प्रकार से भी कहा है-

कबीर कुत्ता राम का, मोतिया मेरा नाव
डोरी लागी प्रेम की, जित खैंचे तित जाव।

Kabir kutta Ram ka,motiya mera naw
Dori lagi prem ki,jit khainche tit jaw.

भावार्थ: कबीर कहते है की वे राम का कुत्ता हैं। उनका नाम मोती है।उन के गले में प्रेम की रस्सी बांधी गई है। उन्हें जिधर खींचा जाता है। वे उधर ही जाते हैं।

Meaning: Kabir is Ram’s dog, call him Motia. Chained with love, the dog goes whereever he is pulled.

फल करन सेवा करै, निश दिन जाँचै राम
कहै कबीर सेवक नहीं, चाहै चैगुन दाम।

Fal karan sewa karai,nish din janchai Ram
Kahai Kabir sewak nahi,chahai chaugun dam.

भावार्थ: जो सेवक इच्छा पुर्ति के लिये सेवा करता है ईश्वर प्रतिदिन उसकी भक्ति की परीक्षा लेता है। कबीर कहते है की वह सेवक नहीं है। वह तो अपनी सेवा के बदले चार गुणा कीमत वसुलना चाहता है।

Meaning: One who is servicing for fruits, Ram tests him daily. Kabir says such a one is not a servant but a trader who wants four times price.

कबीर के धार्मिक सद्भाव के ऊपर राम के दोहे:Kabir ke Dharmik Sadbhva Mein Ram Par Dohe

राम रहीमा ऐक है, नाम धराया दोई,
कहे कबीर दो नाम सूनि, भरम परो मत कोई।

Ram Rahima ek hai ,nam dharaya doye
Kahe Kabira do nam suni , bharam paro mati koye .

भावार्थ: राम और रहीम एक ही ईश्वर के दो नाम दिये गये हैं। कबीर कहते हैं कि ये दो नाम सुनकर हमें किसी प्रकार का भ्रम नहीं होना चाहिये । कबीर धर्मिक एकता के पक्षधर थे।

Meaning: Ram and Rahim are one, only two names have been given. Kabir says hearing two names ,none should be mistaken .

काबा फिर कासी भया, राम भया रहीम।
मोट चून मैदा भया, बैठ कबीर जीम॥

Kaba phir kaasee bhaya, raam bhaya raheem.
Mot choon maida bhaya, baith kabeer jeem.

भावार्थ: सांप्रदायिक सद्भावना के कारण कबीर के लिए काबा काशी में परिणत हो गया। भेद का मोटा चून या मोठ का चून अभेद का मैदा बन गया, कबीर उसी को जीम रहा है।

कबीर के राम भक्ति के उत्तम फल पर दोहे: Kabir ke Ram Bhakti ka Uttam Fal Par Dohe

कबीर केवल राम कह, सुध गरीबी चाल
कूर बराई बूरसी, भरी परसी झाल।

Kabir kewal Ram kah,sudh garibi chal
Koor barayee boorsi,bhari parsi jhal.

भावार्थ: कबीर कहते है कि गरीब के भाॅंति विनम्र भाव से प्रभु का नाम लो। तुम्हारे सभी सांसारिक दुख दूर हो जायेंगे। लोग अंहकार में इस उपदेश को नहीं मानते हैं और त्रिविध ताप से झुलसते रहते हैं।

Meaning: Kabir says, utter only the name of Ram, that too in gentle and humble way. People do not like this sane counsel and therefore keep burning themself in the worldly fire.

जाति जुलाहा क्या करै, हृदय बसय गूपाल
कबीर रमैया कंठ मिाहि चुकहि सब जंजाल।

Jati julaha kya kare , hirday basay Gupal
Kabir Ramaiya kanth mihi , chukahi sab janjal .

भावार्थ: किसी की जाति से क्या अर्थ है। जुलाहा जाति से क्या मतलव जब हृदय में भगवान का निवास है। कबीर की वाणी राम के सत्संग में रहने से हीं उनके सारे सांसारिक झंझटों का अंत हो जाता है।

Meaning: What is if I am weaver by cast, the God resides in my heart. The voice of Kabir has met Ram, all the troubles are gone .

जबहि राम हृदय धरा, भया पाप का नाश
मानो चिंगी आग की, परी पुराने घास।

JabahiRam hirday dhara, bhaya pap ka nash
Mano chingi aag ki, pari purane ghas.

भावार्थ: ज्योंही हृदय में राम को धारन किया, समस्त पापों का समूल नाश हो गया| जैसे की आग की एक चिंगारी से पुराने सूखे घास जलकर समाप्त हो जाते हैं।

भावार्थ: The moment Ram is kept in the heart, vices are destroyed. As if a spark of the fire has fallen on the dry old grass.

दुखिया मुआ दुख करि सुखिया सुख को झूर
दास आनंदित राम का दुख सुख डारा दूर।

Dukhiya muaa dukh kari sukhiya sukh ko jhur
Das aanandit Ram ka,dukh sukh dara door.

भावार्थ: दुखी प्राणी दुख मे मरता रहता है एंव सुखी व्यक्ति अपने सुख में जलता रहता है पर ईश्वर भक्त हमेशा दुख-सुख त्याग कर आनन्द में रहता है।

भावार्थ: Afflicted dies in pain delighted dies in pleasure. The slave of Ram remains happy by leaving pleasure and pain far away.

राम से विरह पर कबीर के दोहे: Ram Ke Virah Par Dohe

जौं रोऊँ तौ बल घटै, हँसौं तौ राम रिसाइ।
मनहीं माँहि बिसूरणां, ज्यूँ धुँण काठहिं खाइ॥

jau rooon to bal ghatai,,Hansau to Ram risai।
Manahin maanhi bisoorana, jyoon ghunn kaathahin khai॥

भावार्थ: यदि आत्मारूपी विरहिणी प्रिय के वियोग में रोती है, तो उसकी शक्ति क्षीण होती है और यदि हँसती है, तो परमात्मा नाराज़ हो जाते हैं। वह मन ही मन दुःख से अभिभूत होकर चिंता करती है और इस तरह की स्थिति में उसका शरीर अंदर−अंदर वैसे ही खोखला होता जाता है, जैसे घुन लकड़ी को अंदर−अंदर खा जाता है।

चकवी बिछुटी रैणि की, आइ मिली परभाति।
जे जन बिछूटे राम सूँ, ते दिन मिले न राति॥

Chakavee bichhutee raini kee, aai milee parabhaati.
Je jan bichhoote raam soon, te din mile na raati.

भावार्थ: रात के समय में अपने प्रिय से बिछुड़ी हुई चकवी (एक प्रकार का पक्षी) प्रातः होने पर अपने प्रिय से मिल गई। किंतु जो लोग राम से विलग हुए हैं, वे न तो दिन में मिल पाते हैं और न रात में।

अंषड़ियाँ झाँई पड़ी, पंथ निहारि-निहारि।
जीभड़ियाँ छाला पड्या, राम पुकारि-पुकारि॥

Anshadiyaan jhaanee padee, panth nihaari-nihaari.
Jeebhadiyaan chhaala padya, Raam Pukari Pukari.

भावार्थ: प्रियतम का रास्ता देखते-देखते आत्मा रूपी विरहिणी की आँखों के आगे अँधेरा छाने लगा है। उसकी दृष्टि मंद पड़ गई है। प्रिय राम की पुकार लगाते-लगाते उसकी जीभ में छाले पड़ गए हैं।

अंखियाॅ तो झैन परि, पंथ निहार निहार
जीव्या तो छाला पारया, राम पुकार पुकार।

Aakhiyan to jhain pari , panth nihar nihar
Jivya to chhala parya , Ram pukar pukar .

भावार्थ:प्रभु की राह देखते-देखते आॅंखें में काला झम्ई पड़ गया है और राम का नाम पुकारते-पुकारते जीव मे छाला पड़ गया है। प्रभु तुम कब आओगे।

Meaning: There has been darkness around my eyes continuously seeing your way.There has been blister in my tongue by indefinitely calling Ram.

अंखियाॅ प्रेम कसैया, जीन जाने दुखदै
राम सनेहि कारने, रो-रो रात बिताई।

Aankhiya prem kasaiya , jin jane dukhdai
Ram sanehi karne , ro ro rat bitai .

भावार्थ: राम के विरह में आॅंखे लाल हो गयी हैं। प्रभु तुम इसे आॅंख का रोग मत समझना| राम के प्रेम-स्नेह में पूरी रात रो-रो कर बीत रही है।

Meaning: The eyes have become red by continuously weeping , you donot think it the disease of the eyes. Because of the love of Ram , the night has been spent weeping continuously.

पावक रुपि राम है,सब घट राहा समय
चित चकमक चाहते नाहि,धुवन हवै-हवै जाय।

Pawak rupi Ram hai ,sab ghat raha samai
Chit chakmak chahtai nahi , dhuwan hwai hwai jaye.

भावार्थ: भगवान अग्नि एंव प्रकाश स्वरुप हैं जो सभी शरीरों में समाहित हैं। राम रुपी प्रकाश का चकाचोंध हमारे चित में समायोंजित नहीं हो पाता है और वह धुआॅं रुप में विलोपित हो जाता है।

Meaning: Ram is like fire and light which is inside all the body. Brightness of Ram cannot be fathomed in the mind,try to fathom it and it turns smoke .

राम भक्ति के महत्त्व पर दोहे: Ram Bhakti ka Mahatv

झूठा सब संसार है, कोउ ना आपना मीत
राम नाम को जानि ले, चले जो भौजाल जीत।

Jhutha sab sansar hai,kou na aapna meet
Ram nam ko jaani le, chalai so bhaujaal jeet.

भावार्थ: यह संसार असत्य है। इस में अपना कोई मित्र नहीं है। केवल राम नाम का ज्ञान कर लो तो तुम इस संासारिक जाल में उलझने से बच जाओगे और माया जाल से पार पा लोगे।

Meaning: The world is false, no one is a friend. Get to know the name of Ram and you will win against the illusions of this world.

ऐक बुंद ते सब किया, नर नारी का नाम
सो तु अंतर खोजि लैय, सकल बियापक राम।

Ek bund te sab kiya,nar nari ka nam
So tu antar khoji lai,sakal biyapak Ram.

भावार्थ: वीर्य के एक बूंद से संसार के समस्त नर नारी की उत्पति हुई है। इसी से प्रभु की सर्वब्यापकता के रहस्य का पता चलता है तुम इसे अपने ह्रदय के अन्तरतम में खोजो ।

Meaning: Every being is made with a single drop, has given the name of male and female. Go and seek the difference if you can in the omnipresence of Ram.

कबीर के राम के भक्ति पर जोर देने पर दोहे: Ram Bhakti Par Jor

कबीर मुख सोई भला, जो मुख निकसै राम
जा मुख राम ना निकसै, ता मुख है किस काम।

Kabir mukh soi bhala, jo mukh niksai Ram
Ja mukh Ram na niksai, ta mukh hai kis kam.

भावार्थ: कबीर के अनुसार जिस मुख से राम का नाम लिया जाता है-वह मुख अच्छा है जिस मुख से राम नाम का उच्चारण नहीं किया जाता है-वह मुख व्यर्थ है।

Meaning: The mouth which speaks Ram is good. The mouth which does not speak Ram is worthless.

नर नारी सब नरक है, जब लग देह सकाम
कहै कबीर ते राम के जो सूमिरै निहकाम।

Nar nari sab narak hai jab lag deh sakam
Kahai Kabir te Ram ke jo sumirai nihkam .

भावार्थ: सभी नर-नारी नरक में हैं जबतक वे सकाम शरीर में हैं। कबीर कहते हैं कि वे राम की शरण में हैं जो उनका निष्काम सुमिरन करता है।

Meaning: Men women are all hell so long the body is lustful.Kabir says He belongs to Ram who remembers without lust or desire.

प्रीति बहुत संसार मे, नाना बिधि की सोय
उत्तम प्रीति सो जानिय, राम नाम से जो होय।

Preeti bahut sansar me ,nana bidhi ki soye
Uttam preeti so janiye ,Ram nam se jo hoye .

भावार्थ: संसार में अपने प्रकार के प्रेम होते हैं। बहुत सारी चीजों से प्रेम किया जाता है। पर सर्वोत्तम प्रेम वह है जो राम के नाम से किया जाये।

Meaning: There are various types of love in the world. The best type of love is that which is with the name of Ram.

कबीर सब सुख राम है, और ही दुख की राशि
सुा, नर, मुनि, जन,असुर, सुर, परे काल की फांसि।

Kabir sab sukh Ram hai,aaur hi dukh ki rashi
Sur,nar,muni,jan,asur,sur,pare kal ki fansi.

भावार्थ: केवल प्रभु समस्त सुख देने वाले है। अन्य सभी दुखों के भंडार है। देवता, आदमी, साधु, राक्षस सभी मृत्यु के फांस में पड़े है। मृत्यु किसी को नहीं छोड़ता।राम ही सुखों के दाता है।

Meaning: Kabir says Ram is the only happiness, others are all store of pain. The demi-gods, men, hermits, demons, all are in the trap of death.

राम रसायन प्रेम रस, पीबत अधिक रसाल
कबीर पिबन दुरलभ है, मांगे शीश कलाल।

Ram rasayan prem ras , peebat aadhik rasal
Kabir piban durlav hai , mange shish kalal .

भावार्थ: राम नाम की दवा प्रेम रस के साथ पीने में अत्यंत मधुर है। कबीर कहते हैं कि इसे पीना अत्यंत दुर्लभ है क्यों कि यह सिर रुपी अंहकार का त्याग मांगता है।

Meaning: The medicine of Ram with juice of love is very sweet to drink. Kabir says its drinking is rare , it demands sacrifice of ones head .

काल छिछाना है खड़ा, जग पियारे मीत
राम सनेही बाहिरा, क्यांे सोबय निहचिंत।

Kal chichana hai khara,jag piyare meet
Ram sanehi bahire,kyo sobay nihchint.

भावार्थ: मृत्यु रुपी बाज तुम पर झपटने के लिये खड़ा है। प्यारे मित्रों जागों। परम प्रिय स्नेही भगवान बाहर है। तुम क्यों निश्चिंत सोये हो। भगवान की भक्ति बिना तुम निश्चिंत मत सोओ।

Meaning: The death hawk is standing, my dear friend awake. Affectionate Ram is standing, why then are you sleeping carelessly.

कबीर दुनिया से दोस्ती, होेये भक्ति मह भंग
एंका ऐकी राम सो, कै साधुन के संग।

Kabir dunia se dosti,hoye bhakti mah bhang
Eka eki Ram so,kai sadhun ke sang.

भावार्थ: कबीर का कहना है की दुनिया के लोगों से मित्रता करने पर भक्ति में बाधा होती है। या तो अकेले में प्रभु का सुमिरन करो या संतो की संगति करो।

Meaning: Kabir says friendship with the world, hinders my devotion to God. Either you pray alone or keep the company of saints.

रामभक्ति में माया की बाधा पर दोहे: Rambhakti mein Maya ki Badha

कबीर माया पापिनी, हरि सो करै हराम
मुख कदियाली, कुबुधि की, कहा ना देयी राम।

Kabir maya papini,Hari so karai haram
Mukh kadiyali kubudhi ki,kaha na deyee Ram.

भावार्थ: कबीर कहते है की माया पापिनी है। यह हमें परमात्मा से दूर कर देती है। यक मुंह को भ्रष्ट कर के राम का नाम नहीं कहने देती है।

Meaning: Kabir says illusions are vices,these keep us far from Ram. The mind is blackened with corrupt nature, the lips do not utter Ram.

माया चार प्रकार की, ऐक बिलसै एक खाये
एक मिलाबै राम को, ऐक नरक लै जाये।

Maya char prakar ki,ek bilse ek khaye
Ek milabai Ram ko, ek narak lai jaye.

भावार्थ: माया चार किस्म की होती है। एक तातकालिक आनंद देती है। दूसरा खा कर घोंट जाती है। एक राम से संबंध बनाती है और एक सीधे नरक ले जाती है।

Meaning: Illusions are of four types,one gives pleasure other devours. One unites with Ram,one takes to hell.

माया जुगाबै कौन गुन, अंत ना आबै काज
सो राम नाम जोगबहु, भये परमारथ साज।

Maya jugbai kaun gun, ant na aabai kaj
So Ram nam jogabahu,bhay parmarath saj.

भावार्थ: माया जमा करने से कोई लाभ नहीं। इससे अंत समय में कोई काम नहीं होता है।केवल राम नाम का संग्रह करो तो तुम्हारी मुक्ति सज संवर जायेगी।

Meaning: Collecting illusions has no benefit, it does not help in the last. Collect only the name of Ram, it will decorate your salvation.

आंधी आयी ज्ञान की, ढ़ाहि भरम की भीति
माया टाटी उर गयी, लागी राम सो प्रीति।

Aandhi aayee gyan ki,dhahi bharam ki bhiti
Maya tati ur gayee,lagi Ram so priti.

भावार्थ: जब ज्ञान की आंधी आती है तो भ्रम की दीवाल ढ़ह जाती है।माया रुपी पर्दा उड़ जाती है और प्रभु से प्रेम का संबंध जुड़ जाता है।

Meaning: When the storm of knowledge come,the wall of doubts tumble down. The curtain of illusion was blown off when one got the love of Ram.

कामिनि काली नागिनि, तीनो लोक मंझार
राम सनेही उबरै, विषयी खाये झार।

Kamini kaali nagini,teeno lok manjhar
Ram sanehi ubrai,vishyi khaye jhar.

भावार्थ: एक औरत काली नागिन है जो तीनों लोकों में व्याप्त है। परंतु राम का प्रेमी व्यक्ति उसके काटने से बच जाता है। वह विषयी लोभी लोगों को खोज-खोज कर काटती है।

Meaning: A woman is black viper in all the three worlds. An affectionate of Ram is saved, a lustful sensual falls prey to the ever searching snake.

कबीर के रामभक्ति में सत्संग के महत्त्व पर दोहे: Ram Bhakti mein Satsang ka Mahatv

कबीर तासै प्रीति करि जाको ठाकुर राम
पंड़ित राजई भूपती आबहि कौने काम।

Kabir tasai priti kari jako thakur Ram
Pandit rajai bhupati aabahi kaune kam .

भावार्थ: कबीर का मत है कि उन लोगों से प्रेम करें जिनके मालिक राम हैं। तुम्हें पंडित,ज्ञानी राजा या दुनिया के शक्तिशाली लोगों से क्या काम है। कबीर प्रभुु भक्तों की संगति पर बल देते हैं।

Meaning: Kabir says love him whose master is Ram. You have no need with knowledgeble king or the master of the world.

गिरही सेबै साधु को, साधु सुमिरै राम
यामे धोखा कछु नाहि, सारै दौउ का काम।

Girhi sebai sadhu ko,sadhu sumirai Ram
Yame dhokha kachhu nahi,sarai dou ka kam.

भावार्थ: एक पारिवारिक गृहस्थ को संतों की सेवा करनी चाहिये और संत को केवल राम का सुमिरन करना चाहिये।इस में कोई भ्रम या धोखा नहीं है। दोनो का यही काम है और इसी मे दोंनो का कल्याण है।

Meaning:A householder should serve the saint,the saint should remember Ram. There is no delusion in this,this is the proper duty of both.

जा पल दर्शन साधु का ता पल की बलिहार
राम नाम रसने बसै, लीजैय जनम सुधार।

Ja pal darshan sadhu ka,ta pal ki balihar
Ram nam rasne basai,leejay janam sudhar.

भावार्थ: जिस क्षण किसी संत का दर्शन होता है-उस क्षण को कोटिशः धन्यवाद। उनके दर्शन मात्र से मुॅंह में राम नाम का वास हो जाता है और हमारा जीवन सुधर जाता है।

Meaning: The moment you see a saint,thank for that moment. When the name of Ram comes to the tongue, the life is transformed.

मेरा संगी दो जना , ऐक वैशनव ऐक राम
वे दाता है मुक्ति के, वे सुमिरावै नाम।

Mera sangi do jana,ek vaishnav ek Ram
Wey data hain mukti ke,wey sumirabai nam.

भावार्थ: मेरे दो साथी हैं एक वैष्णव और एक राम। राम मुक्ति दाता हैं और वैष्णव नाम का सुमिरण कराने वाले हैं। विष्णु के भक्तों को वैष्णव कहते हंै।

Meaning: I am in the company of two,one vaishnav and one Ram. One is the provider of emancipation and the other reminds to remember the name of Ram.

संगति किजै संत की , जिनका पूरा मान
अंतोले ही देत है, राम सरीखा घान।

Sangati kijay sant ki,jinka pura man
Antole hi det hai,Ram sarikha dhan.

भावार्थ: संतों की संगति करे जिनका मन ज्ञान से परिपूर्ण हो। बिना मोल भाव और तौल के ही वे राम जैसा धन प्रदान करते हंै।

Meaning: Keep the company of saints who have the complete mind. Only a saint gives without weighing the wealth like Ram.

राम बुलाबा भेजिया, दिया कबीरा रोये
जो सुख साधु संग मे सो वैकुंठ ना होये।

Ram bulawa bhejiye,diya Kabira roye
Jo sukh sadhu sang me,so Baikunth na hoye.

भावार्थ: राम का बुलावा सुन कर कबीर को रोना आ गया। साधु की संगति में जो सुख उन्हें मिलता है वह प्रभु के निवास वैकुण्ठ में नहीं प्राप्त है। संत की संगति का यह महत्व है।

Meaning: Kabir started weeping on the call of Ram. The happiness which is in the company of saint is not in the heaven.

राम भक्ति में सावधानियाँ -कबीर के दोहे: Ram Bhakti Mein Savdhaniyan Dohe by Kabir

जप माला छापा तिलक, सरै ना ऐको काम
मन कंचे नाचे बृथा, संचे रचे राम।

Jap mala chhapa tilak,sarai na eko kam
Man kanche nache britha,sanche rache Ram.

भावार्थ: जप माला तिलक लगाना आदि से कोई उद्देश्य पूरा नहीं होता है। अपरिपक्व मन से माला गिनने और नाचने से नहीं होगा। प्रभु तो केवल सच्चे प्रेमी को ही मिलते है।

Meaning:Muttering prayers,counting beads,printing mark do not fulfill any purpose.A crude mind uselessly dances, Ram adopts only the true.

उॅचै कुल के कारने, बंस बांध्यो हंकार
राम भजन हृदय नाहि, जायों सब परिवार।

Unchai kul ke karne,bansh bandhyo hankar
Ram bhajan hirday nahi,jayo sab pariwar.

भावार्थ: उच्च कुल-वंश के कारण बाॅंस घमंड से बंधा हुआ अकड़ में रहते है। जिसके ह्रदय में राम की भक्ति नहीं है उसका संपूर्ण परिवार नष्ट हो जाता है। बाॅंस के रगड़ से आग पैदा होने के कारण सारे बाॅंस जल जाते हंै।

Meaning: The bamboo is bound with vanity being of a high caste, All family perishes, if there is no devotion to Ram.

उजर घर मे बैठि के, कैसा लिजय नाम
सकुट के संग बैठि के, किउ कर पाबे राम।

Ujar ghar me baithi ke kiska lijay nam
Sakut ke sang baithi ke,kiuo kar pabe Ram.

भावार्थ: सुनसान उजार घर में बैठकर किसका नाम पुकारेंगे।इसी तरह मुर्ख-अज्ञानी के साथ बैठकर ईश्वर को कैसे प्राप्त कर सकंेगे।

Meaning: Sitting in a deserted house, whom does one call. Sitting with an idiot, how does one get Ram.

गंगा तीर जु घर करहि पीवहि निरमल नीर
बिन हरि भगति ना मुक्ति होई, युॅं कहि रमे कबीर।

Ganga teer ju ghar karahi ,peebahi nirmal neer
Binu Hari bhagati na mukti hoyee youn kahi rame Kabir .

भावार्थ: गंगा के किनारे घर बनाकर बसने और गंगा का पवित्र जल पीने से क्या होगा। बिना प्रभु की भक्ति के मुक्ति संभव नहीं है। यह कबीर का दृढ़ विश्वास है।

Meaning: What is if one lives at the bank of Ganges and drinks pure Ganga water. There is no salvation without devotion to God ,says Kabir.

कबीर मन मरकत भया, नेक ना कहु ठहराय
राम नाम बांधै बिना, जित भाबै तित जाये।

Kabir Mann markat bhaya,nek na kahu thahrai
Ram nam bandhai bina,jit bhabai tit jaye.

भावार्थ: कबीर के अनुसार यह मन बंदर की भाँति है। जो क्षण भर के लिये भी कहीं नहीं ठहरता है। इसकी जहाँ इच्छा होती है-यह चला जाता है। यदि इसे राम नाम के साथ नहीं बाँधा जाये।

Meaning: Kabir says the mind has become a monkey, it does not stay for a moment. It goes where it likes, if it is not tied with the name of Ram.

कबीर के दोहे राम पर दृढ़ विश्वास रखने को कहते हैं:Firm Belief Dohe on Ram by Kabir

ऐसा कोन अभागिया जो बिस्वासे और
राम बिना पग धारन कु, कहो कहां है ठौर।

Aisa kaun abhagiya jo biswase aur
Ram bina pag dharan ku,kaho kaha hai thaur .

भावार्थ: जो व्यक्ति प्रभु के अतिरिक्त कहीं अन्यत्र विश्वास करता है-वह अभागा है। राम के अतिरिक्त पैर रखने की कहीं जगह नहीं मिल सकती है।

Meaning: Who is that unfortunate who believes in anything but God. There is no place to keep your feet except what has been given by Ram

बिस्वासी हवै हरि भजय, लोहा कंचन होय
राम भजे अनुराग से, हरख सोक नहि दोय।

Biswasi hawai Hari bhajay , loha kanchan hoye
Ram bhajay anurag se , harakh shok nahi doye .

भावार्थ: राम का भजन विश्वास पूर्वक करों-लोहा भी सोना हो जायेगा। यदि राम का भजन प्रेम पूर्वक किया जाये तो हर्ष और शोक दोनो कभी नहीं हो सकते। लोहा से सोना का तात्पर्य व्यक्ति का परिष्कार है।

Meaning: Iron becomes gold if God is prayed faithfully. Worship Ram with love , pleasure and pain both will disappear .

राम नाम की लौ लगी, जग से दूर रहाय
मोहि भरोसा इस्ट का, बंदा नरक ना जाय।

Ram nam ki law lagi , jag se door rahaye
Mohi bharosa Ist ka, banda narak na jaye .

भावार्थ: जो राम से आकर्षित हो जाता है वह सांसारिक इच्छाओं से दूर हो जाता है। कबीर को विश्वास है कि अपने इष्ट-भगवान के कारण अब वह नरक नहीं जायेगा।

Meaning: I have the attachment with the name of Ram , I am far from the worldly desires . I have the trust of God that I will not go to hell now .

राम किया सोई हुआ, राम करै सो होय
राम करै सो होऐगा, काहे कलपै कोय।

Ram kiya soi hua , Ram karai so hoye
Ram karai so hoyega , kahe kalpau koye .

भावार्थ: ईश्वर ने जो पूर्व में किया वहीं हुआ। राम जो कर रहे है-वहीं हो रहा हैं। प्रभु जो भविष्य में करेंगे -वहीं होगा। तो फिर कोई क्यों रोता कलपता है।

Meaning: Whatever Ram did has happened , whatever Ram is doing is happening. Whatever Ram will do will happen , why is anybody weeping .

राखनहारा राम है, जाय जंगल मे बैठ
हरि कोपै नहि उबरै सात पताले पैठ।

Rakhanhara Ram hai , jaye jungal me baith
Hari kopai nahi ubrai sat patale paith .

भावार्थ: यदि कोई जंगल में है तब भी भगवान उस की रक्षा करते हैं पर भगवान यदि किसी पर कुपित हो तो सात तह पाताल लोक में भी उसकी कोई रक्षा नहीं कर सकता।

Meaning: If Ram is the protector , he will protect sitting in the forest. If God is angry then none can save even if he is in under seven worlds.

कबीर के दोहे कहते हैं राम सर्वव्यापक ईश्वर हैं: Ram is Omnipresent

घट-घट में राम- Ram is Everywhere

मोमे तोमे सरब मे जहं देखु तहं राम
राम बिना छिन ऐक ही, सरै न ऐको काम।

Mome tome sarab me jahn dekhu tahn Ram
Ram bina chhin ek hi , sarai na eko kam .

भावार्थ: मुझ में तुम में सभी लोगों में जहाॅं देखता हूॅं वहीं राम है।राम के बिना एक क्षण भी प्रतीत नहीं होता है। राम के बिना कोई कार्य सफल नहीं होता है।

Meaning: In me you and all ,wherever I see there is Ram.Not even a second is without Ram , nothing is successful without Ram .

बाहिर भीतर राम है नैनन का अभिराम
जित देखुं तित राम है, राम बिना नहि ठाम।

Bahir bhitar Ram hai nainan ka abhiram.
Jit dekhun tit Ram hai , Ram bina nahi tham

भावार्थ: प्रभु बाहर-भीतर सर्वत्र विद्यमान है। यही आॅंखें का सुख है। जहाॅं भी दृष्टि जाती है। वही राम दिखाई देते है। राम से रिक्त कोई स्थान नहीं है। प्रभु सर्वव्यापक हैं।

Meaning: Ram is outside and inside , Ram is the pleasure of eyes . Where ever I see, I see Ram , no place is without Ram .

कस्तुरी कुंडल बसै,मृग ढूढ़ै वन माहि
ऐसे घट घट राम हैं,दुनिया देखे नाहि।

Kasturi kundali basai, mrig dhundai van mahi
Aaise ghat ghat Ram hain , duniya dekhe nahi.

भावार्थ: मृग के नाभि में कस्तुरी रहता है पर वह जंगल में ढूंढ़तेे रहती है। ईश्वर सर्वत्र वत्र्तमान हैं परंतु दुनिया उन्हें देख नहीं पाती है।

Meaning: The musk is in umbilicus , the deer searches in the forest. Same way God is omnipresent , the world does not see Him.

राम नाम तिहुं लोक मे सकल रहा भरपूर
जो जाने तिही निकट है, अनजाने तिही दूर।

Ram nam tihun lok me sakal raha bharpoor
Jo jane tihi nikat hai , anjane tihi door .

भावार्थ: तीनों लोक में राम नाम व्याप्त है। ईश्वर पूर्णाता में सर्वत्र वत्र्तमान हैं। जो जानता हे-प्रभु उसके निकट हैं परंतु अनजान-अज्ञानी के लिये बहुत दूर हैं।

Meaning: The name of Ram is all-pervasive in the three worlds. One who knows is near but the ignorant is very far from this truth.

कबीर खोजी राम का गया जु सिंघल द्वीप
साहिब तो घट मे बसै जो आबै परतीत।

Kabir khoji Ram ka gaya ju Singhal dweep
Sahib to ghat mein basai jo aabai parteet .

भावार्थ: कबीर ईश्वर को ढूढ़ने श्रीलंका द्वीपतक गये किंतु ईश्वर तो शरीर में ही विद्यमान हैं। यदि तुम्हें विश्वास हो तो तुम उन्हें अपने हृदय में ही पा लोगे।

Meaning: Kabir went up to Sri Lanka island in search of God. But God resides in the body if you believe it you will find Him .

घट बिन काहूँ ना देखिये राम रहा भरपूर
जिन जाना तिन पास है दूर कहा उन दूर।

Ghat bin kahun na dekhiye Ram raha bharpoor
Jin jana tin pass hai , door kahan un door .

भावार्थ: कोई भी शरीर राम से शुन्य नहीं है। सभी शरीर में ईश्वर पूर्ण रुपेण वत्र्तमान हैं। जो ज्ञानी है उसके पास ही ईश्वर हैं। जो उन्हें दूर मानता है- भगवान उससे बहुत दूर हैं।

Meaning: Do not see any body without God, Ram is present in everybody. Who knows it will find him near, who says he is not there will find him far.

कबीर के अनुसार राम भक्ति न करने का दुष्परिणाम: Ram Bhakti Na Karane Ka Dushparinam Dohe By Kabir

आठ पहर यूॅ ही गया, माया मोह जंजाल
राम नाम हृदय नहीं, जीत लिया जम काल।

Aath pahar youn hi gaya,maya moh janjal
Ram nam hirday nahi,jeet liya jam kal.

भावार्थ: माया मोह अज्ञान भ्रम आसक्ति में संपूर्ण जीवन बीत गया। हृदय में प्र्रभु का नाम भक्ति नहीं रहने के कारण मृत्यु के देवता यम ने मनुष्य को जीत लिया है।

Meaning: Twentyfour hours have gone by chained with ignorance and delusion. Ram is not in the heart and the life is won by the God of death.

तीरथ वरत करि जग मुआ, जुरै पानि नहाय
राम नाम जाने बिना, काल जुगन जुग खाय।

Tirath vrat kari jag mua, jure pani nahaye
Ram nam jane bina, kal jugan jug khaye.

भावार्थ: र्तीथ,व्रत एंव स्नान करते-करते संसार मृत प्राय हे किंतु बिना राम का नाम जाने ही। जन्म एंव मृत्यु का चक्र निरंतर जारी है। बिना ईश्वर को जाने मुक्ति संभव नहीं।

Meaning: Doing pilgrimage, fasting and bathing, the world is dying. Without knowing the name of Ram the cycle of life and death continues.

कबीर के राम भक्ति के रस पर दोहे: Kabir Ke Ram Bhakti Ras Par Dohe

सूरा सोई जानिये, लड़ा पांच के संग
राम नाम राता रहै, चढ़ै सबाया रंग।

Sura soyee janiye,lara panch ke sang
Ram nam rata rahai,chadhai sabaya rang.

भावार्थ: सूरवीर उसे जानो जो पाॅंच बिषय-विकारों के साथ लड़ता है। वह सर्वदा राम के नाम में निमग्न रहता है और प्रभु की भक्ति में पूरी तरह रंग गया है।

Meaning: Know him to be brave one who fights with the five senses. One who is absorbed in name of Ram and has become coloured with Him.

जल ज्यों प्यारा माछली, लोभी प्यारा दाम
माता प्यारा बालका, भक्ति प्यारी राम।

Jal jyon pyara machhli,lovi pyara dam
Mata pyara balka,bhakti pyari Ram.

भावार्थ: जिस प्रकार जल मछली को, धन लोभी मनुष्य को तथा पुत्र अपने माता को प्यारा होता है, उसी प्रकार भक्त को प्रभु की भक्ति प्यारी होती है।

Meaning: As the water is loved by fish, greedy loves the wealth. As the son is loved by the mother,so also Ram is loved by the devotee.

भक्ति दुहिली राम की, जस खाड़े की धार
जो डोलै सो कटि परै, निश्चल उतरै पार।

Bhakti duhili Ram ki,jas khanre ki dhar
Jo dolai so kati pare,nischal utrai par.

भावार्थ: राम की भक्ति दुधारी तलवार की तरह है। जो संसारिक वासना से चंचल मन वाला है, वह कट कर मर जायेगा पर स्थिर बुद्धि वाला इस भव सागर को पार कर जायेगा।

Meaning: Devotion is walking on double edged sword which is very difficult. One who is shaky will find it difficult to cross and will be cut himself to pieces.

मन की मनसा मिटि गयी, दुरुमति भयी सब दूर
जब मन प्यारा राम का, नगर बसै भरपूर।

Man ki mansa miti gayee,durmati bhaiyee sab door
Jab man pyara Ram ka,nagar basai bharpoor.

भावार्थ: जब मन की इच्छायें-तृष्णायें मिट जाती है तो मन के सारे विकार भी मिट जाते हैं। जब लोग प्रभु के प्यारे हो जाते हैं तो राम का निवास लोगों के हृदय नगर में रहता है।

Meaning: If the desires of mind are gone,all the perversions have gone far. When the man becomes beloved of Ram,then Ram resides in his heart.

ज्ञान से राम भक्ति अधिक महत्त्वपूर्ण: Gyan se adhik Ram Bhakti ka Mahatv

ज्ञानी ज्ञाता बहु मिले, पंडित कवि अनेक
राम रटा निद्री जिता, कोटि मघ्य ऐक।

Gyani gyata bahu miley , pandit kavi aanek
Ram rata indri jeeta , koti madhey ek .

भावार्थ: ज्ञानी और ज्ञाता बहुतों मिले। पंडित और कवि भी अनेक मिले। किंतु राम का प्रेमी और इन्द्रियजीत करोड़ों मे भी एक ही मिलते हैं।

Meaning: We get to see numerous scholars, pundits and wise poets. But only one in crores is the lover of Ram and victor of sense organs.

पंडित पढ़ते वेद को, पुस्तक हस्ति लाद
भक्ति ना जाने राम की, सबे परीक्षा बाद।

Pandit padhte ved ko , pustak hasti lad
Bhakti na jane Ram ki ,sabe pariksha bad.

भावार्थ: पंडित वेदों को पढ़ते है। हाथी पर लादने लायक ढ़ेर सारी पुस्तकें पढ़ जाते हैं। किंतु यदि वे राम की भक्ति नहीं जानते हैं-तो उनका पढ़ना व्यर्थ है और उनकी परीक्षा बेेकार चली जाती है।

Meaning: The wise read vedas with loads of books on elephant. But who does not know the devotion of Ram , his reading is worthless.

कबीर पढ़ना दूर करु, पोथी देहु बहाइ
बाबन अक्षर सोधि के, राम नाम लौ लाइ।

Kabir padhna door karu , pothi dehu bahai
Baban akshar sodhi ke , Ram nam lau lai .

भावार्थ: कबीर का मत है कि पढ़ना छोड़कर पुस्तकों को पानी मे प्रवाहित कर दो। बावन अक्षरों का शोधन करके केवल राम पर लौ लगाओ और परमात्मा पर ही ध्याान केंद्रित करों।

Meaning: Kabir says keep reading at bay, throw the books in water. After dissertation of fifty two letters concentrate your mind on Ram.

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4 Comments on “कबीर के राम पर दोहे | Kabir Dohe on Ram”

  1. संत कबीर के गुरु हिन्दू , उनका गुरुमंत्र हिन्दू लेकिन कुछ लोग आज उनको हिन्दू विरोधी सिद्ध करने में लगे हुए हैं। ईश्वर उनको सद्बुद्धि दें।

  2. आज कल के पाखंडी संत कबीर दास को परमात्मा घोषित करके स्वयं को साकार ईश्वर बता दिया है और लोगों को मूर्ख बना रहे हैं। लोगों को कबीर जी के दोहे सही से पढ़ना चाहिए।

  3. ” वागाराम H भादरूणा ” नाम को गुगल पर या यूट्यूब चैनल पर सर्च ज़रूर करें और पुराने जमाने के देशी वीणा भजन ज़रूर सुनिएगा धन्यवाद जयश्रीराम

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