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जेहि पर कृपा न करहिं पुरारी|Jehi Par Kripa Na Karahi Purari

जेहि पर कृपा न करहिं पुरारी। सो न पाव मुनि भगति हमारी॥अस उर धरि महि बिचरहु जाई। अब न तुम्हहि माया निअराई॥ अर्थ: भगवान विष्णु नारद जी से कहते हैं कि हे मुनि जिस पर पुरारी …

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ना चिन्ह त नया कीन मुहावरा|Na Chinh Ta Naya Kin

पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में ये बड़ी पुरानी कहावत है। और ध्यान देने वाली बात ये है की ये आज भी बड़ी सटीक बैठती है। ना चिन्ह त नया कीन का अर्थ – Na Chinh …

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ज्ञानी से ज्ञानी मिले दोहा|Gyani Ko Gyani Mile

अर्थ: जब दो ज्ञानी (जानकर) लोग मिलते हैं तो ज्ञानवर्धक बाते करते हैं। जिससे ज्ञान बढ़ता है और लोगों को आनंद मिलता है।
जबकि यदि ज्ञानी को कोई अज्ञानी व्यक्ति मिल जाए तो केवल तर्क वितर्क में केवल विवाद ही होता है। जो किसी के लिए लाभप्रद नहीं होता।

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एकादशी संकल्प मंत्र | Ekadashi Sankalp Mantra

एकादशी व्रत के लिए संकल्प करने से पहले पवित्रीकरण और आचमन भी किया जाता है। इन्हे भी अवश्य करें। पवित्रीकरण और आचमन के बाद एकादशी संकल्प मंत्र ( Ekadashi Sankalp Mantra ) मन्त्र बोलना चाहिए। इस …

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छिति जल पावक गगन समीरा। Chiti Jal Pavak Gagan Samira

छिति जल पावक गगन समीरा पद का अर्थ छिति जल पावक गगन समीरा। पंच रचित अति अधम सरीरा॥ अर्थ : पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश – इन पाँच तत्वों से यह अत्यंत नीच शरीर रचा …

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धर्मो रक्षति रक्षितः