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छह मूर्ख-पुरानी ग्रामीण आँचलिक कहानी

दादाजी भी उस लड़के से कुछ कम नहीं थे। बोले, “अरे वाह, यह फूलकी तो बहुत ही बढ़िया दिखती है। फट-फट बजती है, और पट-पट बोलती है।” लड़के की खुशी का कोई ठिकाना ही नहीं था। जब ब्यालू का समय हुआ, तो लड़के ने पूछा, “मां, इस फूलकी को मैं कहां रख दूं? ”

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बनिया और कौआ

बनिया और कौआ (पुरानी ग्रामीण आँचलिक कहानी) एक कौआ था। वह रोज बनिये के बेटे के हाथ से पूड़ी छीनकर ले जाता था। उसने कौए को सबक सिखाने की सोची। एक दिन बनिये ने अपने मुंह …

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शिकारपुर के बसंतू साव

शिकारपुर के बसंतू साव (मजेदार पुरानी ग्रामीण आँचलिक कहानी) एक गाँव था शिकारपुर| वहाँ रहने वाले सभी मूर्ख थे| दूर -दूर तक गाँव वालों के मूर्खता की चर्चा थी| शिकारपुर में एक थे बसंतू साव| उनका …

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मगर और ग्वाला

मगर और ग्वाला (पुरानी ग्रामीण आँचलिक कहानी) एक था मगर। एक दिन उसने सोचा कि चलूं और इस नदी में से निकल कर तालाब में पहुंच जाऊं। नदी तो सूखने लगी है। रात होते ही मगर …

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दरवाजा खोल रे भटूरिया

दरवाजा खोल रे भटूरिया (पुरानी ग्रामीण आँचलिक कहानी) एक थी बकरी। वह जंग में झोंपड़ा बनाकर रहती थी। उसके सात बच्चे थे। उनको वह ‘भटूरिया’ कहती थी। बकरी रोज जंगल में चरने जाती थी। जाते समय …

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धर्मो रक्षति रक्षितः