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विरह पर कबीर के दोहे|Kabir Ke Dohe On Separation

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अंखियाॅ तो झैन परि, पंथ निहार निहार
जीव्या तो छाला पारया, राम पुकार पुकार।

Aakhiyan to jhain pari , panth nihar nihar
Jivya to chhala parya , Ram pukar pukar .

भावार्थ:प्रभु की राह देखते-देखते आॅंखें में काला झम्ई पड़ गया है और राम का नाम पुकारते-पुकारते जीव मे छाला पड़ गया है। प्रभु तुम कब आओगे।

Meaning: There has been darkness around my eyes continuously seeing your way.There has been blister in my tongue by indefinitely calling Ram.

अंखियाॅ प्रेम कसैया, जीन जाने दुखदै
राम सनेहि कारने, रो-रो रात बिताई।

Aankhiya prem kasaiya , jin jane dukhdai
Ram sanehi karne , ro ro rat bitai .

भावार्थ: राम के विरह में आॅंखे लाल हो गयी हैं। प्रभु तुम इसे आॅंख का रोग मत समझना| राम के प्रेम-स्नेह में पूरी रात रो-रो कर बीत रही है।

Meaning: The eyes have become red by continuously weeping , you donot think it the disease of the eyes. Because of the love of Ram , the night has been spent weeping continuously.

आये ना सकि हों तोहि पै, सकुन ना तुझे बुलाये
जियारा यों हि लेहुगे, बिराह तापै-तापै।

Aaye na saki hon tohi pai , sakun na tujhe bulai
Jiyara yon hi lehuge , birah tapai tapai.

भावार्थ: मैं तुम्हारे पास नहीं आ सकता और न हीं तुम्हें अपने पास बुला सकतर हुॅं। क्या तुम मुझे अपने विरह में जलाकर मेरे प्राण लेलोगें?

Meaning: I cannot come to you neither I can call you near me. You will take my life with the heat of your separation .

कबीर वैध्या बुलैया, पकड़ि के देखी बानहि
वैदया न वेदन जानसि, कारक कलेजि माहि।

Kabir vaidya bulaiya , pakri ke dekhi banhi
Vaidya na vedan jansi , karak kaleji mahi .

भावार्थ: कबीर कहते है गुरु रुपी वैद्य को बुलाया उसने मेरी बाॅह पकड़ कर देखी पर वह मेरे रोग का निदान नहीं कर पाया कारण पीड़ा तो मेरे हृदय में है।

Meaning: Kabir called the doctor, he held his arm and examined. The doctor could not diagnose the disease as the pain is in his heart .

कयी ब्राहिनि को मीच दे, कयी आपा दिख लायी
आठ पहर का दझना मो पायी साहा ना जायी।

Kai birhini ko meech de , kai aapa dikh lai
Aath pahar ka dajhna mo pai saha na jai .

भावार्थ: मैं चोंबीसो घंटे तुम्हारे विरह में जलता रहता हूॅं। या तो तुम अपना दर्शन र्दो अथवा मृत्यु दो। अब यह विरह सहन नहीं कर पा रहा हूॅं।

Meaning: Either you grant me death or show me yourself. Burning for twenty four hours , I cannot bear it now .

जलो हमारा जिवना,यों मति जीवो कोई
सब कोई सुतो निंद भरि,हमको निंद ना होई।

Jalo humara jivna ,yon mati jeevo koi
Sab koi suta nind bhari ,humku nind na hoi

भावार्थ: मेरा जीवन ज्ञान अग्नि में जल रहा है। सांसारिक लोगों की तरह जीना बेकार है। सभी लोग अज्ञान रुपी नींद में पूरी तरह निमग्न हैं पर मुझमें वह अज्ञान की नींद नहीं है।

Meaning: My life is burning ,no one should live like this. Everyone is in deep slumber but I do not have the sleep at all .

जो जान बिरहि नाम के,झिने पिंजर तासु
नैन ना आबे निंदरि,देह ना छाढ़िया मानसु।

Jo jan birhi nam ke, jhine pinjar tasu
Nain na aabe nindri, deh na chadhiya mansu.

भावार्थ: जो व्यक्ति प्रभु के नाम के विरह में तड़प् रहा हो-उसका शरीर गल कर कमजोर हो जाता है| उसके आॅंखें की नींद गायब हो जाती है और उसके देह पर मांस भी नहीं चढ़ता है।

Meaning: One who has been separated from his lover ,his body is dissolved. He does not get to sleep, neither does flesh stay on his body.

देखत-देखत दिन गया,निशि भी देखत जाये
बिरहिनि पिव पावै नाहि,जियारा ताल्पहाथ जाये।

Dekhat dekhat din gaya ,nishi bhi dekhat jaye.
Birhini piv pawai nahi ,jiyara talphat jaye .

भावार्थ: देख्ते-देखते रात और दिन बीत जाता है परंतु विरह में प्रभु को नहीं पाने से तड़पते-तड़पते प्राण चला जायेगा।

Meaning: Waiting for him, the days end ,nights also ends in the same. But the separated lover do not get the God and the life ends in vain.

पावक रुपि राम है,सब घट राहा समय
चित चकमक चाहते नाहि,धुवन हवै-हवै जाय।

Pawak rupi Ram hai ,sab ghat raha samai
Chit chakmak chahtai nahi , dhuwan hwai hwai jaye.

भावार्थ: भगवान अग्नि एंव प्रकाश स्वरुप हैं जो सभी शरीरों में समाहित हैं। राम रुपी प्रकाश का चकाचोंध हमारे चित में समायोंजित नहीं हो पाता है और वह धुआॅं रुप में विलोपित हो जाता है।

Meaning: Ram is like fire and light which is inside all the body. Brightness of Ram cannot be fathomed in the mind,try to fathom it and it turns smoke .

अंदेसो नहीं भाग्सि,संदेसो नही आये
कयी हरि आया भाग सो,कयी हरि के पासे जाये।

Andeso nahi bhagsi , sandeso nahi aaye
Kai Hari aaya bhag so ,kai Hari ke pase jaye .

भावार्थ: मेरे भ्रम भी दूर नहीं होते और ईश्वर का कोई संदेश भी नहीं आ राहा हैं। यह भ्रम और दुख तभी मिटेगा जब या तो प्रीभु आकर मिलें या मैं प्रभु के पास चला जाउॅं।

Meaning: Doubts do not go and no counselling is coming. This doubt and grief will go when I will go near Him .

अबिनासि की सेज पर केलि करे आनंद
करहे कबीर वा सेज पर बिलसत परमानंद।

Abinasi ki sej par keli kare aanand
Kahai Kabir wa sej par bilsat parmanand .

भावार्थ: भक्त प्रमात्मा के सेज पर आनंद पूर्वक खेल रहा है। कबीर कहते हैं कि वह बिलासिता पूर्वक उस बिछावन पर परमानंद प्राप्त करता है।

Meaning: The devotee is playing with pleasure ln the bed of God. Kabir says he is getting absolute pleasure luxuriously on that bed .

आग लगि संसार में,झारि-झारि परे संसार
कबीर जलि कंचन भया,कंच भया संसार।

Aag lagi sansar mein , jhari jhari pare sansar
Kabir jali kanchan bhaya , kanch bhaya sansar.

भावार्थ: संसार में बिषय-भेंगों और इच्छाओं की आग लगी है और उसकी चिंगारी पूरे संसार को जला रही है। कबीर तो जल कर तपकर स्वर्ण हो गये है। पर संसार शीशा की तरह गल राह है। कबीर भक्ति मार्ग की गुणवत्ता बता रहे हैं।

Meaning: The world is in fire and the spark is falling all over the world. Kabir has become gold with burning but the world has become glass.

कबीर हंसना दूर करो,रोने से करु चीत
बिन रोये क्यों पाईये, प्रेम पियारा मीत।

Kabir hasna door karu , rone se karu chit
Bin roye kyon paiye , prem piyara meet .

भावार्थ: कबीर हॅंसने अर्थात संसारिक सुख की चिंता नहीं करते और प्रभु के वियोग में रोने की सीख देते हैं। प्रिय-प्यारे मित्र ईश्वर के लिये बिना व्याकुलता के उन्हें नहीं पाया जा सकता है।

Meaning: Kabir says keep laughing at distance , attach your mind with weeping. You will not find your loving friend without weeping .

विषय से सम्बंधित लेख :

कबीर के दोहे-भाग 1-अनुभव: Kabir Ke Dohe-Experience
कबीर के दोहे-भाग 2-काल: Kabir Ke Dohe-Death
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कबीर के दोहे-भाग 9-चेतावनी: Kabir Ke Dohe-Warning
कबीर के दोहे-भाग 10-वाणी: Kabir Ke Dohe-Speech
कबीर के दोहे-भाग 11-परमार्थ: Kabir Ke Dohe-Welfare
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