विजय स्तम्भ चित्तौड़गढ़ |Vijay Stambh Chittorgarh


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भारतीय मूर्तिकला का विश्वकोश : विजय स्तम्भ चित्तौड़गढ़

भारतीय मूर्तिकला का विश्वकोश कहे जाने वाले इस भव्य विजय स्तम्भ (चित्तौड़गढ़ दुर्ग) का निर्माण महाराणा कुंभा ने मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी पर विजय के उपलक्ष में 1440 ईस्वी में शुरू करवाया था जो 1448 में बनकर पूर्ण हुआ। इस भव्य स्तंभ के भीतर विभिन्न देवी-देवताओं की मूर्तियां लगी होने के कारण इसे ‘भारतीय मूर्तिकला का विश्वकोष’ कहा जाता है।

विजय स्तम्भ (चित्तौड़गढ़ दुर्ग) का संसार भर में इसका कोई सानी नहीं। इसका निर्माण महाराणा कुम्भा के शासनकाल में हुआ। इसे बनने में 8 वर्ष लगे। ये भगवान विष्णु को समर्पित है। ये 9 मंजिला एक स्तम्भ है। इसकी ऊंचाई 122 फीट है, जिसमें 157 सीढियां हैं। स्तम्भ का निर्माण वास्तुशिल्पी मंडन जी द्वारा निर्मित नक्शे के आधार पर उनके निर्देशन में हुआ। इसके वास्तुकार जैता व उनके पुत्र नापा, पुंजा आदि थे।

लोग 8वीं मंज़िल तक ही जाते हैं। 9वीं के लिए उल्टी सीढियां हैं। 9वीं मंज़िल पर कीर्तिस्तंभ प्रशस्ति अंकित है।

कीर्ति स्तम्भ के भीतर व बाहर भगवान विष्णु के सभी स्वरूपों सहित अनेक मूर्तियां सुसज्जित हैं।

इस कलाकृति के आगे तो आगरे का ताजमहल भी फीका है ऐसी ऐतिहासिक धरोहर को देखकर दिल को बड़ा सुकून मिलता है।

पोस्ट लेखक :- तनवीर सिंह सारंगदेवोत (लक्ष्मणपुरा – मेवाड़)

From : राजपूताना इतिहास और विरासत

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