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भारत का स्वर्ण युग …

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चक्रवती सम्राट महाराज विक्रमादित्य के काल में भारत का कपड़ा, गर्म मसाले , विदेशी व्यपारी सोने के वजन से खरीदते थे|
 भारत में इतना सोना आ गया था कि विक्रमादित्य काल में सोने की सिक्के चलते थे|

 उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य का राज्य भारतीय उपमहाद्वीप के अलावा ईरान, इराक और अरब में भी था..
महाराज विक्रमादित्य की अरब विजय का वर्णन अरबी कवि जरहाम किनतोई ने अपनी पुस्तक ‘सायर-उल-ओकुल’ में किया है.|

इतिहास ग्रंथों के अनुसार यह पता चलता है कि अरब और मिस्र भी विक्रमादित्य के अधीन थे|


तुर्की के इस्ताम्बुल शहर की प्रसिद्ध लायब्रेरी मकतब-ए-सुल्तानिया में एक ऐतिहासिक ग्रंथ है ‘सायर-उल-ओकुल’, उसमें राजा विक्रमादित्य से संबंधित एक शिलालेख का उल्लेख है जिसमें कहा गया है कि

‘…वे लोग भाग्यशाली हैं, जो उस समय जन्मे और राजा विक्रम के राज्य में जीवन व्यतीत किया। वह बहुत ही दयालु, उदार और कर्तव्यनिष्ठ शासक थे ..’


नवरत्नों को रखने की परंपरा महान सम्राट विक्रमादित्य से ही शुरू हुई है जिसे तुर्क जेहादी अकबर ने भी अपनाया था|

सम्राट विक्रमादित्य के नवरत्नों के नाम धन्वंतरि, क्षपणक, अमरसिंह, शंकु, बेताल भट्ट, घटखर्पर, कालिदास, वराहमिहिर और वररुचि कहे जाते हैं| इन नवरत्नों में उच्च कोटि के विद्वान, श्रेष्ठ कवि, गणित के प्रकांड विद्वान और विज्ञान के विशेषज्ञ आदि सम्मिलित थे|


विक्रम संवत ( हिन्दु नव वर्ष ) भी महाराजा विक्रमादित्य का ही चलाया हुआ है |

Estimated Empire spread of King Vikramaditya

Coin of King Vikramditya
King Vikramaditya Statue
Vikram Samvat 2077 is AD 2020

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