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Shri Hanuman ji and Shri Tulasidas ji

तुलसीदास के दोहे-7: आत्म अनुभव

जद्यपि जग दारून दुख नाना।सब तें कठिन जाति अवमाना। इस संसार में अनेक भयानक दुख हैं किन्तु सब से कठिन दुख जाति अपमान है। रिपु तेजसी अकेल अपि लघु करि गनिअ न ताहुअजहुॅ देत दुख रवि …

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तुलसीदास के दोहे-6: संगति का असर

संगति शब्द ही दो शब्दों से मिलकर बना है सम अर्थात बराबर , गति अर्थात परिणति या परिणाम। इसका सीधा सा अर्थ है की जिस संगति में , जिस तरह के लोगों के साथ आप रहते …

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तुलसीदास के दोहे-5-अहंकार

बन बहु विशम मोह मद माना।नदी कुतर्क भयंकर नाना। मोह घमंड और प्रतिश्ठा बीहर जंगल और कुतर्क भयावह नदि हैं। बड अधिकार दच्छ जब पावा।अति अभिमानु हृदय तब आबा।नहि कोउ अस जनमा जग माहीं।प्रभुता पाई जाहि …

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तुलसीदास के दोहे-4: गुरू महिमा

बंदउ गुरू पद कंज कृपा सिंधु नर रूप हरिमहामोह तम पुंज जासु बचन रवि कर निकर ।गुरू कृपा के सागर मानव रूप में भगवान है जिनके वचन माया मोह के घने अंधकार का विनाश करने हेतु …

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तुलसीदास के दोहे-3: ईश्वर भक्ति

मूक होई बाचाल पंगु चढई गिरिवर गहनजासु कृपा सो दयाल द्रवउ सकल कलि मल दहन ।ईश्वर कृपा से गूंगा अत्यधिक बोलने बाला और लंगडा भी उॅचे दुर्गम पहाड पर चढने लायक हो जाता है। ईश्वर कलियुग …

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