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श्री संकटा माता आरती अर्थ सहित | Shri Sankata Mata Ki Aarti

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पूजा के बाद संकटा माता की आरती (Sankata Mata Ki Aarti) भी करने का विधान है। विशेषकर संकटा माता के व्रत में यह विशेष फलदायी है। यद्यपि माता के मंदिरों में यह नित्य यही गयी जाती है। आप भी श्रद्धानुसार इसे माता की पूजा विधान में सम्मिलित कर सकते हैं।

श्री संकटा माता आरती – Sankata Mata Aarti Lyrics in Hindi

जय जय संकटा भवानी, करहूं आरती तेरी ।
शरण पड़ी हूँ तेरी माता, अरज सुनहूं अब मेरी ॥
जय जय संकटा भवानी..॥

नहिं कोउ तुम समान जग दाता, सुर-नर-मुनि सब टेरी ।
कष्ट निवारण करहु हमारा, लावहु तनिक न देरी ॥
जय जय संकटा भवानी..॥

काम-क्रोध अरु लोभन के वश, पापहि किया घनेरी ।
सो अपराधन उर में आनहु, छमहु भूल बहु मेरी ॥
जय जय संकटा भवानी..॥

हरहु सकल सन्ताप हृदय का, ममता मोह निबेरी ।
सिंहासन पर आज बिराजें, चंवर ढ़ुरै सिर छत्र-छतेरी ॥
जय जय संकटा भवानी..॥

खप्पर, खड्ग हाथ में धारे, वह शोभा नहिं कहत बनेरी ॥
ब्रह्मादिक सुर पार न पाये, हारि थके हिय हेरी ॥
जय जय संकटा भवानी..॥

असुरन्ह का वध किन्हा, प्रकटेउ अमत दिलेरी ।
संतन को सुख दियो सदा ही, टेर सुनत नहिं कियो अबेरी ॥
जय जय संकटा भवानी..॥

गावत गुण-गुण निज हो तेरी, बजत दुंदुभी भेरी ।
अस निज जानि शरण में आयऊं, तेहि कर फल नहीं कहत बनेरी ॥
जय जय संकटा भवानी..॥

जय जय संकटा भवानी, करहूं आरती तेरी ।
भव बंधन में सो नहिं आवै, निशदिन ध्यान धरीरी ॥

जय जय संकटा भवानी, करहूं आरती तेरी ।
शरण पड़ी हूँ तेरी माता, अरज सुनहूं अब मेरी ॥

इति श्री संकटा माता आरती समाप्त

संकटा माता व्रत कथा व पूजा विधि यहां पढ़ें! 

संकटा माता की आरती अर्थ सहित : Sankata Mata Ki Aarti Meaning in Hindi

जय जय संकटा भवानी, करहूं आरती तेरी ।
शरण पड़ी हूँ तेरी माता, अरज सुनहूं अब मेरी ॥
जय जय संकटा भवानी..॥

अर्थ : हे संकठा भवानी माता मैं आपकी आरती करता हूँ। हे माँ मैं आपकी शरण में हूँ , अब आप मेरी विनती सुनिए। हे माता संकठा आपकी जय हो।


नहिं कोउ तुम समान जग दाता, सुर-नर-मुनि सब टेरी ।
कष्ट निवारण करहु हमारा, लावहु तनिक न देरी ॥
जय जय संकटा भवानी..॥

अर्थ: हे माता संसार में कोई आपके सामान देने वाला दानी नहीं है , ऐसा देवता , मनुष्य और मुनि सबका कहना है। हे माँ अब बिना जरा भी विलम्ब करे हमारे कष्ट दूर कीजिये।हे माता संकठा आपकी जय हो।

काम-क्रोध अरु लोभन के वश पापहि किया घनेरी ।
सो अपराधन उर में आनहु, छमहु भूल बहु मेरी ॥
जय जय संकटा भवानी..॥

अर्थ : हे माता वासना , क्रोध और लालच के चक्कर में पढ़कर मैंने बहुत सारे पाप किये हैं। वह सब अपराध -पापकर्म आप ह्रदय में सब जानती हैं , मेरी उन बहुत सारी भूलों को आप क्षमा कर दें।हे माता संकठा आपकी जय हो।

हरहु सकल सन्ताप हृदय का, ममता मोह निबेरी ।
सिंहासन पर आज बिराजें, चंवर ढ़ुरै सिर छत्र-छतेरी ॥
जय जय संकटा भवानी..॥

अर्थ : हे माता मेरे ह्रदय के सब दुःख हर लें और (अनुचित) ममता, मोह हटाकर हृदय स्वच्छ कर दें। हे माँ आप सिहासन पर विराजमान है, और (आपके सम्मान में ) सर पर छत्र लगा हुआ है और चंवर चलाया जा रहा है।हे माता संकठा आपकी जय हो।

खप्पर, खड्ग हाथ में धारे, वह शोभा नहिं कहत बनेरी ॥
ब्रह्मादिक सुर पार न पाये, हारि थके हिय हेरी ॥
जय जय संकटा भवानी..॥

अर्थ: हे माँ आपने हाथों में खप्पर और खड्ग (तलवार) धारण किया हुआ है। उस रूप की शोभा कहते नहीं बनती। आपकी महिमा का पार पाने में ब्रह्मा आदि देवता भी असमर्थ हैं और मन में हार मान गए। अर्थात आपकी महिमा अपरम्पार है।हे माता संकठा आपकी जय हो।

असुरन्ह का वध किन्हा, प्रकटेउ अमत दिलेरी ।
संतन को सुख दियो सदा ही, टेर सुनत नहिं कियो अबेरी ॥
जय जय संकटा भवानी..॥

अर्थ : हे माता आपने वीरता पूर्वक प्रकट होकर असुरों का वध किया है। संतो की पुकार सुनते ही बिना देरी किये आपने इस प्रकार सदा सुखी किया है।हे माता संकठा आपकी जय हो।

गावत गुण गण नित हो तेरी, बजत दुंदुभी भेरी ।
अस निज जानि शरण में आयऊं, तेहि कर फल नहीं कहत बनेरी ॥
जय जय संकटा भवानी..॥

अर्थ : हे माता ! भक्त आपके गुणों का नित्य ही गान करते हुए आपके सम्मान में दुंदुभि और भेरी बजाते हैं। इस प्रकार जो आपको अपना जानकार सापकी शरण में (पूर्ण भाव से ) आ जाते हैं उसका फल बताये नहीं बनता , अर्थात उसका फल अपरिमित है।हे माता संकठा आपकी जय हो।

जय जय संकटा भवानी, करहूं आरती तेरी ।
भव बंधन में सो नहिं आवै, निशदिन ध्यान धरीरी ॥

अर्थ : हे माता संकठा आपकी जय हो। मैं आपकी आरती करता हूँ। जो आपका प्रतिदिन ध्यान करते हैं उनका जन्म मरण के के चक्र से मुक्ति हो जाती हैं वो फिर इस संसार रुपी जाल मैं नहीं फसंते।

जय जय संकटा भवानी, करहूं आरती तेरी ।
शरण पड़ी हूँ तेरी माता, अरज सुनहूं अब मेरी ॥

अर्थ : हे संकठा भवानी माता मैं आपकी आरती करता हूँ। हे माँ मैं आपकी शरण में हूँ , अब आप मेरी विनती सुनिए। हे माता संकठा आपकी जय हो।

इति श्री संकटा माता की आरती समाप्त

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