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ईश्वर की खोज पर कबीर के दोहे|Kabir Ke Dohe-Search of God

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भक्ति महल बहुत उॅच है दूरैहि ते दर्शाय
जो कोइ जन भक्ति करै शोभा बरनि ना जाई।

Bhakti mahal bahut unch hai durahi te darshay
Jo koi jan bhakti karai shobha barani na jay.

भावार्थ: ईश्वर भक्ति का महल बहुत उॅंचा है। यह बहुत दूर से ही दिखाई पड़ता है। जो भी ईश्वर भक्ति में लीन हैं लोग उसके गुणों की ओर सहज हीं आकर्षित होते हैं।

Meaning: The palace of devotion is very high , it is seen from far. Whosoever is devoted to God , his grace is beyond description.

कस्तुरी कुंडल बसै,मृग ढूढ़ै वन माहि
ऐसे घट घट राम हैं,दुनिया देखे नाहि।

Kasturi kundali basai, mrig dhundai van mahi
Aaise ghat ghat Ram hain , duniya dekhe nahi.

भावार्थ: मृग के नाभि में कस्तुरी रहता है पर वह जंगल में ढूंढ़तेे रहती है। ईश्वर सर्वत्र वत्र्तमान हैं परंतु दुनिया उन्हें देख नहीं पाती है।

Meaning: The musk is in umbilicus , the deer searches in the forest. Same way God is omnipresent , the world does not see Him.

कबीर खोजी राम का गया जो सिंघल द्वीप
राम तौ घट भीतर रमि रहै जो आबै परतीत।

Kabir khoji Ram ka gaya jo singhal dwip
Ram tau ghat bhitar rami rahai jo aabai parteet.

भावार्थ: कबीर ईश्वर की तलाश में सिंधल द्वीप गये हैं। किंतु प्रभु तो प्रत्येक घर में अंतरआत्मा में आनंद पूर्वक रमन करते हैं यदि हमें उसकी प्रतीति-उपस्थिति का अनुभव हो।

Meaning: Kabir went to Singhal island in search of Ram. However Ram is inside our own body(as our souls) only those who are enlightened (realised souls) can see him.

ज्यों नैना में पुतली त्यों खालिक घट माहि
मुरखि लोग ना जानही बाहरि ढूंढ़न जाहि।

Jyon naina me putli tyon khalik ghat mahin
Murakhi log na janhi bahari dhudhan jahin.

भावार्थ: जिस प्रकार पुतली आॅंख में रहती है उसी प्रकार प्रभु प्रत्येक घर-धर में वसते हैं। मूर्ख लोग इसे नहीं जानते और उन्हें बाहर ढूंढ़ने जाते हैं।

Meaning: As the pupil is in the eye so is the God in everything. The fools do not know it and go outside to search for Him.

प्रेम ना खेती उपजय प्रेम ना हाट बिकाय
राजा प्रजा जिस रुचै सिर दे सो ले जाय।

Prem na kheti upjay prem na hat bikay
Raja parja jis ruchai sir de so ley jay

भावार्थ: प्रेम न तो खेत में उपजता है और नहीं यह बाजार में बिकता है। राजा या प्रजा जो भी प्रेम प्राप्त करना चाहता है उसे अपना सर्वस्व त्याग करने को तत्पर रहना चाहिये।

Meaning: Love is neither grown in farm nor is sold in the market. King or the subject whosoever likes can get it on sacrificing his head.

जब मन लागा लोभ सां,गया विषय मैं भोय
कही कबीर विचारि के, केहि प्रकार धन होय।

Jab man laga lobh soin, gaya vishay main bhoy
Kahain Kabir vichari ke , kehi prakar dhan hoye

भावार्थ: जब हमारा मन लोभ-लालच में डूबा रहता है तो हम बिषय-बासना,ईच्छा में डूबते जातें हैं। कबीर का स्पष्ट मत कि तब हमें धन नहीं प्राप्त हो सकता है।

Meaning: When the mind is absorbed in lust, the desire engulfs us completely. Kabir wonders, how such one can have any wealth.

तिमिर गया रवि देखते कुमति गयी गुरु ज्ञान
सुमति गयी अति लोभते, भक्ति गयी अभिमान।

Timir gaya ravi dekhte kumati gayi guru gyan
Sumati gayi aati lovte , bhakti gayai bhiman

भावार्थ: सूर्य दिखाई देने पर अंधकार का नाश हो जाता है। कुविचार का अंत गुरु के ज्ञान से संभव है। सुबुद्धि का लोप लोभ के कारण होता है और भक्ति का नाश अभिमान के कारण होता है।

Meaning: Darkness disappears as sun emerges, immorality disappears on enlightenment by a guru. Good sense disappears with greed, devotion goes with pride.

कबीर मंदिर लाख का जरिया हीरा लाल
दिबस चारि का पेखना, विनशि जायेगा काल।

Kabir mandir lakh ka jariya heera lal
Dibas chari ka pekhana , vinashi jayega kal.

भावार्थ: कबीर के अनुसार शरीर लाह कर मंदिर है जिसमे हीरा और लाल जड़े गये हैं। किंतु यह नश्वर शरीर चार दिनों का खेल है कारण यह शीघ्र काल के गाल में समा जायेगा।

Meaning: This body is made of lac, set with jewels like diamond. It is just a show of four days as the death will devour it soon.

कबीर यह संसार है जैसे सेमल फूल
दिन दस के व्यवहार मे, झूठे रंग ना फूल।

Kabir yeh sansar hai jaisa semal fool
Din das ke bayabhar mein, jhuthe rang na fool.

भावार्थ: यह संसार सेमल के फूल सदृश्य दस दिनों के व्यवहार में रंग गायव और मुरझा जाता है। संसार नश्वर है। हमें इसके आकर्षण में जीवन को नहीं गॅंवाना चाहिये।

Meaning: Kabir says this world is like silk cotton flower. After ten days of use the colour fades and the flower withers.

कबीर पानी हौज का, देखत गया बिलाय
यैसे ही जीव जायेगा काल जो पंहुचै आय।

Kabir pani hauj ka, dekhat gaya bilaye
Yaise hi jeev jayega kaal ju pahucha aaye.

भावार्थ: जिस प्रकार टंकी का जल देखते-दखते सूख जाता है उसी तरह काल के आने पर शरीर से जीवन का पलायन हो जाता है।
अतः इस क्षण भंगुर जीवन का मोह उचित नहीं है।

Meaning: As the water in the tank disappears soon after viewing. Same way the life in the body disappears the moment death reach.

मन मक्का दिल द्वारिका, काया कासी जान
दस द्वारै का देहरा, तामै ज्योति पीछान।

Man mecca dil dwarika , kaya kasi jan
Das dware ka dehra, tame joti pichhan

भावार्थ: अपने मन को मक्का,दिल को द्वारिका और शरीर को काशी जानो। यह शरीर दस द्वारों का है जिसके अंतरतम हृदय में प्रभु का वास है।

Meaning: Know the mind as mecca, heart as Dwarika and the body as Kashi. The body has ten doors wherein the God resides in the soul.

तीरथ वरत करि जग मुआ, जुरै पानि नहाय
राम नाम जाने बिना, काल जुगन जुग खाय।

Tirath vrat kari jag mua, jure pani nahaye
Ram nam jane bina, kal jugan jug khaye.

भावार्थ: र्तीथ,व्रत एंव स्नान करते-करते संसार मृत प्राय हे किंतु बिना राम का नाम जाने ही। जन्म एंव मृत्यु का चक्र निरंतर जारी है। बिना ईश्वर को जाने मुक्ति संभव नहीं।

Meaning: Doing pilgrimage, fasting and bathing, the world is dying. Without knowing the name of Ram the cycle of life and death continues.

जबहि राम हृदय धरा, भया पाप का नाश
मानो चिंगी आग की, परी पुराने घास।

JabahiRam hirday dhara, bhaya pap ka nash
Mano chingi aag ki, pari purane ghas.

भावार्थ: ज्योंही हृदय में राम को धारन किया, समस्त पापों का समूल नाश हो गया| जैसे की आग की एक चिंगारी से पुराने सूखे घास जलकर समाप्त हो जाते हैं।

भावार्थ: The moment Ram is kept in the heart, vices are destroyed. As if a spark of the fire has fallen on the dry old grass.

सब बन तो चंदन नहीं, सूरा के दल नाहि
सब समुंद्र मोती नहीं, यूँ साधु जग माहि।

Sab ban to chandan nahi , sura ke dal naahi
Sab samundra moti nahi, youn sadhu jag maahi.

भावार्थ: दुनिया के सभी जंगलों में चंदन नहीं होते, वीरों का दल नहीं होता। सभी समुद्रों में मोती नहीं पाये जाते। इसी प्रकार संसार के सभी साधु ज्ञानी नहीं होते।

भावार्थ: All the forest are not sandal, all the men are not brave. All the seas do not have pearl, all the saints are not wise.

वेद पुरान सब झूठ हैं, उसमे देखा पोल
अनुभव की है बात कबीरा, घट पर्दा देखा खोल।

Ved puran sab jhuth hain , usme dekha pole
Anubhav ki hai bat Kabira, ghat parda dekha khol.

भावार्थ: वेद पुराण आदि धर्मग्रंथ झूठ के पुलिन्दा हैं। कबीर ने उसमे धर्म के पोल देखे हैं। कबीर ने अनुभव किया है। अपने हृदय के परदे को हटा कर देखने से साक्षात ईश्वर का दर्शन संभव हैं।

Meaning: Vedas and puranas are all farce seen the falsehood therein. Kabir says it is the matter of experience, just open the curtain to see.

माया कू माया मिले कर कर लम्बे हाथ
निसप्रेही निरधार को गाहक दीनानाथ।

Maya koo maya mile kar kar lambe hath
Nisprehi niradhar ko gahak dinanath.

भावार्थ: एक संसारी धनी जब दूसरे धनी से मिलता है तो वह प्रेम भरी बातें करता है पर निष्कामी और पुण्यात्मा से केवल परमात्मा ही प्रेम करता है।

Meaning: When the rich meets rich, they talk lovingly. The selfless and pious have only the Almighty to save.

कबीर मुख सोई भला, जो मुख निकसै राम
जा मुख राम ना निकसै, ता मुख है किस काम।

Kabir mukh soi bhala, jo mukh niksai Ram
Ja mukh Ram na niksai, ta mukh hai kis kam.

भावार्थ: कबीर के अनुसार जिस मुख से राम का नाम लिया जाता है-वह मुख अच्छा है जिस मुख से राम नाम का उच्चारण नहीं किया जाता है-वह मुख व्यर्थ है।

Meaning: The mouth which speaks Ram is good. The mouth which does not speak Ram is worthless.

सांचै कोई ना पतियाय,झूठे जग पतियाय
गली गली गोरस फिरै, मदिरा बैठ बिकाय।

Sanchai koi na patiyaye, jhuthe jag patiyay
Gali gali goras firai , madira baith bikay;

भावार्थ: सत्य पर कोई विश्वास नहीं करता और झूठ पर जल्दी भरोसा कर लेते हैं। गाय के दूध को गली -गली में धूम कर बेचना पड़ता है पर मदिरा एक जगह बैंठ कर हीं बिक जाता है।

Meaning: No one believes the truth everyone believes the false. Cows milk is sold running from street to street but wine is sold sitting at one place.

भक्ति भाव भादो नदी,सबहि चले गहराय
सरिता सोइ सराहिये जेठ मास ठहराय।

Bhakti bhaw bhado nadi, sabahi chale ghahray
Sarita soi sarahiye jeth mas thahrai.

भावार्थ: भादों में सभी नदी उफान पर रहती है किंतु जेठ में जो नदी भरी हुई हो-उसी का महत्व है। भक्ति भाव की तुलना भादो के नदी से नहीं जेठ मास की नदी से करनी चाहिये। दिखावटी भक्ति को सच्चा नहीं कहा जा सकता।

भावार्थ: Devotion and feeling is not the river of bhado in which they are full. That river is praised which is full in jeth also.

कबीर गर्व ना कीजिये, रंक ना हसिये कोई
अजहु नाव समूद्र में, ना जानों क्या होई।

Kabir garb na kijiye , rank na hasiye koi
Ajahu naw samudra me , na janon kya hoi.

भावार्थ: मनुष्य का अपने धन का अभिमान नहीं करना चाहिये। किसीकी निर्धनता का मजाक नहीं करना चाहिये। अभी जीवन मझधार में हैं। कौन जाने कब क्या हो जायेगा। समय बहुत बलबान है।

Meaning: No one should be proud , no one should laugh at poor. Presently the boat is in the sea no one knows what will be the fate.

अपना तो कोई नहीं,देखी ठोकि बजायी
अपना अपना क्या करि मोह भरम लपटायी।

Apna to koi nahi , dekhi thoki bajayee
Apna apna kya karai moh bharam laptai .

भावार्थ: बहुत प्रयत्न पूर्वक देखने के बाद भी संसार में अपना कोई नहीं है। लोग माया मोह के भ्रम में संबंधों को अपना बोलते हैं। सभी सांसारिक संबंध क्षणिक होते हैं।

Meaning: None is my own , I have tested it properly. It is useless to tell about own , everyone is engrossed in delusion and doubt .

भक्ति भक्ति सब कोइ कहे भक्ति ना जाने भेद
पूरन भक्ति जब मिले, कृपा करै गुरु देव।

Bhakti bhakti sab koi kahe bhakti na jane bhed
Puran bhakti jab milay , kripa karai guru deb .

भावार्थ: सभी व्यक्ति भक्ति की चर्चा करते हैं किंतु भक्ति में कोई भेदभाव नहीं होता । पूर्ण भक्ति तभी प्राप्त होती है जब गुरुदेव हमपर कृपा करते हैं।

Meaning: Everybody talks of devotion, the devotion does not differentiate. When you get the complete devotion , it is the kindness of the teacher.

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