Join Adsterra Banner By Dibhu

सर्वव्यापक ईश्वर पर कबीर के दोहे|Kabir Ke Dohe On Omnipresence Of God

0
(0)

मैं जानू हरि दूर है हरि हृदय भरपूर
मानुस ढुढंहै बाहिरा नियरै होकर दूर।

Mai janu Hari door hai Hari hirday bharpoor
Manush dhudhai bahira niaray hokar door .

भावार्थ: लोग ईश्वर को बहुत दूर मानते हैं पर परमात्मा हृदय में पूर्णतः विराजमान है। मनुष्य उसे बाहर खोजता है परंतु वह निकट होकर भी दूर लगता है।

Meaning: I know the God is far away but God is fully in heart. People search Him outside , he is near but seems far .

मोमे तोमे सरब मे जहं देखु तहं राम
राम बिना छिन ऐक ही, सरै न ऐको काम।

Mome tome sarab me jahn dekhu tahn Ram
Ram bina chhin ek hi , sarai na eko kam .

भावार्थ: मुझ में तुम में सभी लोगों में जहाॅं देखता हूॅं वहीं राम है।राम के बिना एक क्षण भी प्रतीत नहीं होता है। राम के बिना कोई कार्य सफल नहीं होता है।

Meaning: In me you and all ,whereever I see there is Ram.Not even a second is without Ram , nothing is successful without Ram .

बाहिर भीतर राम है नैनन का अभिराम
जित देखुं तित राम है, राम बिना नहि ठाम।

Bahir bhitar Ram hai nainan ka abhiram.
Jit dekhun tit Ram hai , Ram bina nahi tham

भावार्थ: प्रभु बाहर-भीतर सर्वत्र विद्यमान है। यही आॅंखें का सुख है। जहाॅं भी दृष्टि जाती है। वही राम दिखाई देते है। राम से रिक्त कोई स्थान नहीं है। प्रभु सर्वव्यापक हैं।

Meaning: Ram is outside and inside , Ram is the pleasure of eyes . Where ever I see, I see Ram , no place is without Ram .

राम नाम तिहुं लोक मे सकल रहा भरपूर
जो जाने तिही निकट है, अनजाने तिही दूर।

Ram nam tihun lok me sakal raha bharpoor
Jo jane tihi nikat hai , anjane tihi door .

भावार्थ: तीनों लोक में राम नाम व्याप्त है। ईश्वर पूर्णाता में सर्वत्र वत्र्तमान हैं। जो जानता हे-प्रभु उसके निकट हैं परंतु अनजान-अज्ञानी के लिये बहुत दूर हैं।

Meaning: The name of Ram is all-pervasive in the three worlds. One who knows is near but the ignorant is very far from this truth.

हथियार मे लोह ज्यों लोह मध्य हथियार
कहे कबीर त्यों देखिये, ब्रहम मध्य संसार।

Hathiyar me loh jyo loh madhya hathiyar
Kahe Kabir tyo dekhiye ,Brahm madhya sansar .

भावार्थ: जैसे हथियार में लोहा और लोहा में हथियार है उसी प्रकार कबीर के अनुसार यह संसार भी ब्रहम के बीच वसा है। ब्रहम बिना संसार का कोई अस्तित्व नहीं हो सकता।

Meaning: As is the iron in weapon , weapon is in the iron. Kabir says so you see the world in the midst of God .

पुहुप मध्य ज्यों बाश है,ब्यापि रहा जग माहि
संतो महि पाइये, और कहीं कछु नाहि।

Puhup madhya jyon bash hai , byapi raha jag mahii
Santo mahi payeye , aur kahin katchu nahi .

भावार्थ: जिस प्रकार पुष्प में सुगंध है उसी तरह ईश्वर संपूर्ण जगत में व्याप्त हैं। यह ज्ञान हमें संतों से हीं प्राप्त हो सकता है। इसके अतिरिक्त अन्यत्र कुछ भी नहीं है।

Meaning: As there is fragrance in flower it is omnipresent in world This can be achieved through the company of saints , there is nothing anywhere more .

कबीर खोजी राम का गया जु सिंघल द्वीप
साहिब तो घट मे बसै जो आबै परतीत।

Kabir khoji Ram ka gaya ju Singhal dweep
Sahib to ghat mein basai jo aabai parteet .

भावार्थ: कबीर ईश्वर को ढूढ़ने श्रीलंका द्वीपतक गये किंतु ईश्वर तो शरीर में ही विद्यमान हैं। यदि तुम्हें विश्वास हो तो तुम उन्हें अपने हृदय में ही पा लोगे।

Meaning: Kabir went up to Sri Lanka island in search of God. But God resides in the body if you believe it you will find Him .

घट बिन कहूॅं ना देखिये राम रहा भरपूर
जिन जाना तिन पास है दूर कहा उन दूर।

Ghat bin kahun na dekhiye Ram raha bharpoor
Jin jana tin pass hai , door kahan un door .

भावार्थ: कोई भी शरीर राम से शुन्य नहीं है। सभी शरीर में ईश्वर पूर्ण रुपेण वत्र्तमान हैं। जो ज्ञानी है उसके पास ही ईश्वर हैं। जो उन्हें दूर मानता है- भगवान उससे बहुत दूर हैं।

Meaning: Do not see any body without God, Ram is present in everybody. Who knows it will find him near, who says he is not there will find him far.

घट बढ़ कहूॅं ना देखिये प्रेम सकल भरपूर
जानै ही ते निकट है अनजाने तै दूर।

Ghat badh kahun na dekhiye prem sakal bharpoor
Janai hi te nikat hai anjane tai door .

भावार्थ: परमात्मा कहीं भी कम या अधिक नहीं हैं। वे सभी जगत पूर्ण परमात्मा हैं-प्रेम से परिपूर्ण हैं। ज्ञानी के लिये वे अति निकट और अज्ञानी के लिये बहुत दूर हैं।

Meaning: Do not see God less or more anywhere , love is full everywhere. One who knows this will find him near , ignorant will find him very far.


ज्यों बघुरा बब मध्य, मध्य बघुरा बब
त्यों ही जग मधि ब्रहम है, ब्रहम मधि जगत सुभाव।

Jyon baghura bab madhya , madhya baghura bab
Tyon hi jag madhi Brahm hai,Brahm madhi jagat subhav

भावार्थ: जिस प्रकार तूफान के बीच हवा और हवा के बीच तूफान स्थित है उसी प्रकार संसार के बीच ब्रहम और स्वभाविक रुप से ब्रहम के बीच संसार स्थित है।

Meaning: As there is air in the middle of storm and storm in the middle of air. So also God is in the middle of this world and naturally world is in the middle of God .

ज्यों पाथर मे आग है,त्यों घट मे करतार
जो चाहो दीदार को चकमक होके जार।

Jyon pather mein aag hai tyon ghat me Kartar
Jo chahe didar ko chakmak hoke jar .

भावार्थ: जिस प्रकार पत्थर में आग है उसी तरह प्रत्येक शरीर में प्रभु वसतें हैं। यदि तुम परमात्मा को देखना चाहते हो तो ज्ञान के आग में मन और माया को जलाओं।

Meaning: As there is fire in the stone, there is God in the body. If you wish to see Him , burn in the fire of knowledge.

जैसे तरुबर बीज मह, बीज तरुबर माहि
कहे कबीर बिचारि के, जग ब्रहम के माहि।

Jaise tarubar beej mah ,beej tarubare mahi
Kahe Kabir bichari ke , jag Brahm ke mahi .

भावार्थ: जिस प्रकार वृक्ष बीज में स्थित है तथा बीज वृक्ष में उपस्थित है-उसी प्रकार यह संपूर्ण संसार ब्रहम में है। यह कबीर का निश्चित विचार है।

Meaning: As there is seed in the midst of tree and tree in the midst of seed. Kabir says after thinking that this world is in the midst of God.

ज्यों नैनो मे पुतली, त्यों खालिक घट माहि
मूरख लोग ना जानही, बाहिर ढूढ़न जाहि।

Jyon naino me putli , tyon khalik ghat mahi
Murakh log na janhi , bahir dhudhan jahi .

भावार्थ: आॅंखों में पुतली की भाॅंति हीं प्रत्येक शरीर में प्रभु विराजमान है। यह मुर्ख और अज्ञानी नहीं जानते और उन्हें काशी-कावा,मंदिर-मस्जिद में खोजने जाते हैं।

Meaning: Just like pupil is in the eyes, God is in the body. The ignorant does not know it and go in search outside .

जा कारण जग ढूढ़ीये, सो तो घटहि माहि
परदा दिया भरम का तातै सूझय नाहि।

Ja karan jag dhudhiya , so to ghatahi mahi
Parda diya bharam ka tatai sujhai nahi .

भावार्थ: प्रभु को हम पूरे जग में खोजते फिरते हैं परंतु वह तो हमारे शरीर में हीं बसता है।अविश्वास और भ्रम का परदा हमें प्रभु को देखने नहीं देता है।

Meaning: The God whom we search in the world is present in this body itself. The curtain of doubt within us does not let us see Him .

उहवन तो सब ऐक है, परदा रहिया वेश
भरम करम सब दूर कर, सब ही माहि अलेख।

Uahwan to sab ek hai , parda rahiya wesh
Bharm karam sab door kar , sab hi mahi alekh .

भावार्थ: परमात्मा के यहाॅं सब एक समान है। लेकिन यह शरीर और वेष परदा की तरह काम करता है। हमें अपने समस्त भ्रम को दूर करना चाहिये तब हमें ईश्वर की उपस्थिति की अनुभूति हो सकती है।

Meaning: They all are one ,this body and the dress are its curtain. Clear your all doubts and you will feel the presence of God.

विषय से सम्बंधित लेख :

कबीर के दोहे-भाग 1-अनुभव: Kabir Ke Dohe-Experience
कबीर के दोहे-भाग 2-काल: Kabir Ke Dohe-Death
कबीर के दोहे-भाग 3-माया: Kabir Ke Dohe-Illusion
कबीर के दोहे-भाग 4-नारी: Kabir Ke Dohe-Women
कबीर के दोहे-भाग 5-सेवक: Kabir ke Dohe-Servant
कबीर के दोहे-भाग 6-भिक्षा: Kabir ke Dohe-Alms
कबीर के दोहे-भाग 7-वेश: Kabir ke Dohe-Garb
कबीर के दोहे-भाग 8-बन्धन: Kabir ke Dohe-8 Bondage
कबीर के दोहे-भाग 9-चेतावनी: Kabir Ke Dohe-Warning
कबीर के दोहे-भाग 10-वाणी: Kabir Ke Dohe-Speech
कबीर के दोहे-भाग 11-परमार्थ: Kabir Ke Dohe-Welfare
कबीर के दोहे-भाग 12-वीरता: Kabir Ke Dohe-Bravery
कबीर के दोहे-भाग 13-भक्त: Kabir Ke Dohe-Devotee
कबीर के दोहे-भाग 14-संगति: Kabir Ke Dohe-Company
कबीर के दोहे-भाग 15-परामर्श: Kabir Ke Dohe-Advice
कबीर के दोहे-भाग 16-मन: Kabir Ke Dohe-Mind
कबीर के दोहे-भाग 17-मोह: Kabir Ke Dohe-Attachment
कबीर के दोहे-भाग 18-लोभ: Kabir Ke Dohe-Greed
कबीर के दोहे-भाग 19-पारखी: Kabir Ke Dohe-Examiner
कबीर के दोहे-भाग 20-विरह: Kabir Ke Dohe-Separation
कबीर के दोहे-भाग 21-प्रेम: Kabir Ke Dohe-Love
कबीर के दोहे-भाग 22-ज्ञानी: Kabir Ke Dohe-Scholar
कबीर के दोहे-भाग 23-विश्वास: Kabir Ke Dohe-Faith
कबीर के दोहे-भाग 24-सर्वव्यापक ईश्वर: Kabir Ke Dohe-Omnipotent God
कबीर के दोहे-भाग 25-ईश्वर स्मरण: Kabir Ke Dohe-Rememberance
कबीर के दोहे-भाग 26-खोज: Kabir Ke Dohe-Search
कबीर के दोहे-भाग 27-क्रोध: Kabir Ke Dohe-Anger
कबीर के दोहे-भाग 28-बुद्धि: Kabir Ke Dohe-Intellect
कबीर के दोहे-भाग 29-संतजन: Kabir Ke Dohe-Saints
कबीरदास जी के प्रसिद्द दोहे

Facebook Comments Box

How useful was this post?

Click on a star to rate it!

We are sorry that this post was not useful for you!

Let us improve this post!

Tell us how we can improve this post?

Dibhu.com is committed for quality content on Hinduism and Divya Bhumi Bharat. If you like our efforts please continue visiting and supporting us more often.😀
Tip us if you find our content helpful,


Companies, individuals, and direct publishers can place their ads here at reasonable rates for months, quarters, or years.contact-bizpalventures@gmail.com


Happy to See you here!😀

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्मो रक्षति रक्षितः