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भूत-प्रेत नकारात्मक ऊर्जा से बचने के लिए कुछ सावधानियाँ

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भूत प्रेत बुरी हवाओं नकारात्मक ऊर्जा से बचने के लिए कुछ सावधानियाँ

इंसान जब किसी जगह से जा रहा होता है उस के साथ हवा का अर्थ भूत प्रेतों भटकती हुई आत्मा आदि क्यो लग जाती है। क्या इस मे उस इंसान की कोई गलती होती है या नही? क्योकि यह भी सत्य है कि ईश्वर सिर्फ इंसान का नही है वह समस्त प्राणियों का ईश्वर है उन में यह भूत पिशाच आदि भी आ जाते हैं।

इंसान क्या कर्म न करे जिस से वह इस भूत पिशाच की बला से बचा रहे… जिससे रास्ते बीच मे से कोई नकारात्मक प्रभाव उस के साथ उस के घर तक न आये

यह एक गलती से नही आते इस मे भी बहुत प्रकार की अलग-अलग व्याख्या है जिन से यह सब साथ लग लेते हैं जैसे कि:

1. अगर किसी ने चौराहे आदि पर किया कराया धर रखा है उस पर जो भी प्रथम इंसान उस के स्पर्श में आएगा उस के साथ निसंदेह ही उस के घर उतारे की बला अवश्य आएगी।


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2. नीम, पीपल, बबूल, आंक, शमी, धतूरा, बरगद इनके पास कभी मूत्र न करे, अगर भूल वश हो भी गया उस समय ही माफी मांग लेनी चाहिए, क्योकि यह पेड़ साधारण नही होते हैं। वैसे भी किसी भी पेड़ पौधे के नीचे करना ही नही चाहिए क्योकि किस पेड़ पर किस का निवास है यह किसी को ज्ञात नही होता। जिन पेड़ के नाम लिखे हैं वह पेड़ तंत्र की दुनिया औऱ भूत पिशाच का घर भी होते हैं ।इन पर अच्छी और बुरी दोनों बला आदि का निवास होता है।

3. रास्ते बीच मे अगर कुछ खा पी रहै है हल्का सा अंश जमीन पर गिरा देना चाहिए अगर मीठा हो तो उस को तपती दोपहरी एवं वीरान रास्ते पर खाना ही नही चाहिए। (यदि किसी अनजान व्यक्ति के यहाँ गए हों और वहां भी कुछ खाने को दे तो थोड़ा सा जमीन पर गिरा देना चाहिए खसकर उस दशा में जब उस व्यक्ति से तंत्र टोटके आदि की शंका हो। यह हमारे पुरखे भी किया करते थे।)

4. इत्र आदि सुंगध वाली चीजें लगा कर दोपहर में वीरान जगह पर नही भटकना चाहिए शहर आदि में इतना खतरा नही होता किंतु गाँव देहात आदि में तो पाला अवश्य पड़ जाता है।

5. अगर आप वीरान रास्ते पर से गए आप का स्वभाव अच्छा है, मन मे कुछ सोच विचार कर रहे हो अथवा किसी बात से दुखी हैं, किसी ठंडी जगह बैठ कर आपस मे बात चीत कर रहे हो, अगर उस जगह किसी का निवास हुआ तो वह भी आपके साथ लग सकता है ।मर्द के साथ बहुत कम होता है किंतु महिला के ज्यादा असर नज़र आते हैं । क्योकि आप सभी ने कभी विचार किया हो या जींवन में घटना घटी हो जैसे किसी की महिला गाँव आदि जाती है या किसी अन्य के घर वहां उस की तबीयत एक दम खराब हो जाती है ।अगर समझ मे आ जाये तो ठीक नही तो बुरा ही होता है । उस महिला के मन मे यह क्यो हुआ यह समझ नही आता बस एक बात याद रहती हैं कि उस जगह गए थे वहां से यह पाला पड़ गया आदि-आदि।

6. दोपहर में घर मे रहना ही अच्छा होता है। अगर आपके आस पास कोई मरा हो, स्त्री या पुरुष अपनी बालकनी में खड़े हो, उस का भी प्रभाव पड़ता है किंतु महिला जब गर्भवती अथवा रजस्वला होती है उस समय खतरा होने के जयदा प्रभाव होता है।

7. क्रिया द्वारा किया गया तो सबको पता ही है उस को यहाँ लिखने से क्या लाभ।

8. श्मशान, पूजा, हवन, तीर्थ का अपमान यह भी इंसान को भारी पड़ जाता है । इसलिए इनका सम्मान न करो तो अपमान भी न करना चाहिए।

यह कुछ लक्षण लिखे हैं ज्यादा तर यही वजह निकल कर आती है।

By -Shri Sury Narayan
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