Join Adsterra Banner By Dibhu

सूर्य नमस्कार (मन्त्र एवं आसान सहित )

0
(0)

 सूर्य नमस्कार योगासनों में सर्वश्रेष्ठ है सूर्य नमस्कार ऐसी क्रिया  है जिसको करने के बाद अगर आप कुछ और व्यायाम ना भी कर करें, तो भी काम चल जाएगा। सूर्य नमस्कार ऐसा योग है जो आपको शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रखता है। पौराणिक ग्रंथो में भी सूर्य नमस्कार को सर्वप्रथम बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि भगवान श्रीराम ने भी युद्ध में उतरने से पहले सूर्य नमस्कार किया था। कहते है यह रामायण काल युद्ध आरंभ हो चुका था और अनगिनत शत्रुओं के साथ श्रीराम की वानर सेना के भी कई महारथी शहीद हो गए थे। भगवान विष्णु के अवतार श्रीराम अपनी आंखों के सामने युद्ध का सारा दृश्य देख रहे थे। तभी उन्होंने सोचा कि यह वही घड़ी है जब वे स्वयं युद्ध के मैदान में उतरकर दुष्ट रावण का सर्वनाश करेंगे।

तभी ऋषि अगस्त्य द्वारा श्रीराम को युद्ध भूमि में जाने से पहले ‘सूर्य नमस्कार’ करने की सलाह दी गई। मान्यता है कि पौराणिक इतिहास में यह पहला सूर्य नमस्कार था, जिसे रामायण ग्रंथ के युद्ध कांड में भी शामिल किया गया है। सम्पूर्ण रूप से सूर्य नमस्कार करने के पश्चात ही श्रीराम दैत्य रावण का वध करने के लिए युद्ध भूमि में उतरे थे।

सूर्य नमस्कार द्वारा सूरज की वंदना और अभिवादन किया जाता है। सूर्य ऊर्जा का स्रोत माना जाता है।

भारत के प्राचीन ऋषियों के द्वारा ऐसा कहा जाता है कि शरीर के विभिन्न अंग विभिन्न देवताओं के द्वारा संचालित होते है। मणिपुर चक्र (नाभि के पीछे स्थित जो मानव शरीर का केंद्र भी है) सूर्य से संबंधित है। सूर्य नमस्कार के लगातार अभ्यास से मणिपुर चक्र विकसित होता है। जिससे व्यक्ति की रचनात्मकता और अन्तर्ज्ञान बढ़ते हैं। यही कारण था कि प्राचीन ऋषियों ने सूर्य नमस्कार के अभ्यास के लिए इतना बल दिया।

सौर जाल (यह नाभि के पीछे स्थित होता है, जो मानव शरीर का केंद्रीय बिंदू होता है) को दूसरे दिमाग के नाम से भी जाना जाता है, जो कि सूर्य से संबंधित होता है। यही मुख्य कारण है कि प्राचीन समय के ऋषि-मुनि सूर्यनमस्कार करने की सलाह देते थे, क्योंकि इसका नियमित अभ्यास सौरजाल को बढ़ाता है, जो रचनात्मकता और सहज-ज्ञान युक्त क्षमताओं को बढ़ाने में सहायक होता है। 


banner

सूर्य नमस्कार में १२ आसन होते हैं। इसे सुबह के समय करना बेहतर होता है। सूर्य नमस्कार के नियमित अभ्यास से शरीर में रक्त संचरण बेहतर होता है, स्वास्थ्य बना रहता है और शरीर रोगमुक्त रहता है। सूर्य नमस्कार से हृदय, यकृत, आँत, पेट, छाती, गला, पैर शरीर के सभी अंगो के लिए बहुत से हैं। सूर्य नमस्कार सिर से लेकर पैर तक शरीर के सभी अंगो को बहुत लाभान्वित करता है। यही कारण है कि सभी योग विशेषज्ञ इसके अभ्यास पर विशेष बल देते हैं।

सूर्य नमस्कार के मंत्रो का उच्चारण कैसे करे 

सूर्य नमस्कार के मंत्रो का उच्चारण करने का सिर्फ एक ही नियम है और वो है कृतज्ञ भाव के साथ मंत्रो का उच्चारण करना। हरेक मंत्र का एक विशेष अर्थ होता है परंतु उस मंत्र के अर्थ की गहराई में उतारना अति आव्यशक नही है।

जैसे की, “ॐ भानवे नमः” का अर्थ है “जो हमारे जीवन में प्रकाश लाता है”। जब आप इस मंत्र का उच्चारण करते हैं तो आप सूर्य के प्रति रौशनी व धरती पर जीवन के लिए कृतग्यता प्रकट करते हैं 

सूर्य नमस्कार की प्रक्रिया के दौरान इन मंत्रों की सूर्य की स्तुति में वंदना की जाती है। यह मंत्र सूर्य नमस्कार के लाभों को और अधिक बढ़ा देते हैं। इनका शरीर और मन पर एक सूक्ष्म परंतु मर्मज्ञ प्रभाव पड़ता है। यह १२ मंत्र जो सूर्य की प्रशंसा में गाये जाते हैं इनका सूर्य नमस्कार करने कि प्रक्रिया पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

मंत्रो को सूर्य नमस्कार की प्रक्रिया में कैसे जोड़े

आप सूर्य नमस्कार के मंत्रो का जिव्हा से उच्चारण कर सकते हैं अथवा मन में भी इन मंत्रो का आवाहन कर सकते हैं।

एक सूर्य नमस्कार के चरण के दो क्रम होते हैं- पहला दाएँ पैर के साथ किया जाता है और दूसरा बाएँ पैर के साथ किया जाता है आदर्शतः हमको कम से कम १२ सूर्य नमस्कार प्रतिदिन करने चाहिए परंतु आप जितना भी सहज तरीके से कर सकते हैं उतना ही कीजिए यदि आप ६ सूर्यनमस्कार कर रहे हो तो प्रत्येक नए क्रम में मंत्र का उच्चारण करें। पहला चरण प्रारम्भ करते हुए पहले मंत्र का उच्चारण करें, जब आप दोनों क्रम पूरे करलें तो दूसरा चरण प्रारम्भ करने से पहले दूसरे मंत्र का उच्चारण करें और आगे बढ़ते रहे। इस तरह से आप १२ सूर्य नमस्कार के साथ १२ मंत्रों का उच्चारण कर लेंगे।

यदि आप १२ से कम सूर्य नमस्कार करते हैं, जैसे कि २ अथवा ४, तो आप प्रत्येक आसन के साथ हरेक मंत्र का उच्चारण कर सकते हैं। इस प्रकार से आप प्रत्येक आसन के साथ एक मंत्र का उच्चारण कर सकते हैं।

सूर्य नमस्कार मंत्र क्रम बद्ध

  1. प्रणाम आसन  – मंत्रोच्चारण : ॐ मित्राय नमः (अर्थ:  सबके साथ मैत्रीभाव बनाए रखता है।)
  2. हस्तउत्थान आसन – मंत्रोच्चारण: ॐ रवये नमः। (अर्थ: जो प्रकाशमान और सदा उज्जवलित है।)
  3. हस्तपाद आसन -मंत्रोच्चारण: ॐ सूर्याय नम:। (अर्थ: अंधकार को मिटाने वाला व जो जीवन को गतिशील बनाता है। )
  4. अश्व संचालन आसन-मंत्रोच्चारण: ॐ भानवे नमः। (अर्थ: जो सदैव प्रकाशमान है।)
  5. दंडासन – मंत्रोच्चारण: ॐ खगाय नमः। (अर्थ: वह जो सर्वव्यापी है और आकाश में घूमता रहता है।)
  6. अष्टांग नमस्कार -मंत्रोच्चारण: ॐ पूष्णे  नमः। (अर्थ: वह जो पोषण करता है और जीवन में पूर्ति लाता है।)
  7. भुजंग आसन – मंत्रोच्चारण: ॐ हिरण्यगर्भाय नमः। (अर्थ: जिसका स्वर्ण के भांति प्रभा / रंग है।)
  8. पर्वत आसन – मंत्रोच्चारण: ॐ मरीचये नमः। (अर्थ: वह जो अनेक किरणों द्वारा प्रकाश देता है।)
  9. अश्वसंचालन आसन– मंत्रोच्चारण: ॐ आदित्याय नम:। (अर्थ: अदिति (जो पूरे ब्रम्हांड की माता है) का पुत्र।)
  10. हस्तपाद आसन – मंत्रोच्चारण: ॐ सवित्रे नमः। (अर्थ: जो इस धरती पर जीवन के लिए ज़िम्मेदार है।)
  11. हस्तउत्थान आसन– मंत्रोच्चारण: ॐ अर्काय नमः । (अर्थ: जो प्रशंसा व महिमा के योग्य है।)
  12. ताड़ासन -मंत्रोच्चारण: ॐ भास्कराय नमः। (अर्थ: जो ज्ञान व ब्रह्माण्ड के प्रकाश को प्रदान करने वाला है।)

इन १२ मंत्रो का उच्चारण आसनो के साथ करना बहुत ही लाभप्रद है।

सूर्य नमस्कार के मन्त्र याद रखने की आसान ट्रिक

मिरसू भाखपू हिम आस अभास

  1. मि- ॐ मित्राय नमः।
  2. र- ॐ रवये नमः।
  3. सू- ॐ सूर्याय नमः।
  4. भा- ॐ भानवे नमः।
  5. ख- ॐ खगाय नमः।
  6. पू- ॐ पुषणे नमः।
  7. हि- ॐ हिरण्यगर्भाय नमः।
  8. म- ॐ मरीचये नमः।
  9. आ- ॐ आदित्याय नमः।
  10. स- ॐ सवित्रे नमः।
  11. अ- ॐ अर्काय नमः।
  12. भा- ॐ भास्कराय नमः।
  13. स- ॐ श्रीसवित्रसूर्यनारायणाय नमः।
Image courtsey: Yogaforall.dgns.net
Facebook Comments Box

How useful was this post?

Click on a star to rate it!

We are sorry that this post was not useful for you!

Let us improve this post!

Tell us how we can improve this post?

Dibhu.com is committed for quality content on Hinduism and Divya Bhumi Bharat. If you like our efforts please continue visiting and supporting us more often.😀
Tip us if you find our content helpful,


Companies, individuals, and direct publishers can place their ads here at reasonable rates for months, quarters, or years.contact-bizpalventures@gmail.com


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्मो रक्षति रक्षितः