June 5, 2023

अवधूत महाराज श्री कालू राम जी

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आप सामान्य मानवीय प्रजनन प्रक्रिया की विभूति नहीं थे । आदि गुरु दत्तात्रेय जी महाराज ने स्वयं इस नाम और शरीर को धारण किया था , ताकि सोलहवीं शताब्दी की विभीषिका से इस धरा को संवारने और सत्य पथ पर अग्रसर करने के उद्देश्य से औघड़दानी सदाशिव बाबा कीनाराम को निर्धारित कार्य सम्पन्न करने की दिशा में सचेतक गुरु की भूमिका का निर्वाह कर सके । 

 गिरनार पर्वत पर उपस्थिति हो दिव्य दृष्टि की चेतना देते हुए अपने मां हिंगलाज का स्मरण कराया । मां हिंगलाज के आदेश निर्देश , महाराज श्री बाबा कीनाराम जी के काशी आगमन , हरिश्चन्द्र घाट पर दिव्य शक्तियों सम्बन्धित कुछ परिक्षण के बाद इस स्थल पर यंत्रवत उपस्थित माता हिंगलाज का सानिध्य कराना ।

पूर्व निर्धारित कार्य आरम्भ होने के उपरान्त बाबा कालूराम जी धुएं के रूप में अघोराचार्य बाबा कीनाराम जी के पंच तत्व रूपी शरीर में स्वयं को समाहित करते हूए शिव के गुरु स्वरूपी अवचेतना जागृत की ।

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Book : अघोर : एक दृष्टि में पृष्ठ-३१, भूतनाथ गुड्डू पान्डये जी के द्वारा
प्रकाशक अघोराचार्य बाबा कीनाराम अघोर शोध एवं सेवा संस्थान् वाराणसी ।

लेख सौजन्य : अवधूत भगवान राम विश्व अघोर संगठन

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