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विश्वनाथ मम नाथ पुरारी त्रिभुवन महिमा विदित तुम्हारी अर्थ

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चौपाई
बिस्वनाथ मम नाथ पुरारी। त्रिभुवन महिमा बिदित तुम्हारी॥
चर अरु अचर नाग नर देवा। सकल करहिं पद पंकज सेवा॥

अर्थ: (देवी पार्वती ने शिवजी से कहा-) हे विश्व के स्वामी! हे मेरे नाथ! हे पुर असुर के शत्रु ! आपकी महिमा तीनों लोकों में विख्यात है। चर(चलने वाले जीव), अचर (न चलने वाले जैसे पेड़ इत्यादि), सर्प, मनुष्य और देवता सभी आपके चरण कमलों की सेवा करते हैं।

प्रसंग

यह प्रसंग गोस्वामी तुलसीदास रचित श्री रामचरितमानस के बाल कांड से लिया गया है। इस पद में माता पार्वती जी ने शिव जी को राम कथा सुनाने के लिए अनुरोध की भूमिका बना रही हैं।

इस दोहे का लाभ

  • अगर आर्थिक समस्याएँ ज्यादा हों या रोजगार की समस्या हो तो इस दोहे का जाप करना चाहिए।
  • प्रातः और रात्रि के समय भगवान शिव के समक्ष कम से कम १०८ बार इस दोहे का जाप करना चाहिए।

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धर्मो रक्षति रक्षितः