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बेलपत्र का वृक्ष शुभ क्यूँ माना जाता है|Belpatra Tree

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बेलपत्र का वृक्ष शुभ क्यूँ माना जाता

बेलपत्र वृक्ष का उद्गम

बेलपत्र(Belpatra) वृक्ष की कहानी- एक बार माता पार्वती के पसीने की बूंद मंदराचल पर्वत पर गिर गई और उससे बेल का पेड़ निकल आया। माता पार्वती के पसीने से बेल के पेड़ का उद्भव हुआ। इसमें माता पार्वती के सभी रूप बसते हैं। वे पेड़ की जड़ में गिरिजा के स्वरूप में, इसके तनों में माहेश्वरी के स्वरूप में और शाखाओं में दक्षिणायनी व पत्तियों में पार्वती के रूप में रहती हैं।

फलों में कात्यायनी स्वरूप व फूलों में गौरी स्वरूप निवास करता है। इस सभी रूपों के अलावा, मां लक्ष्मी का रूप समस्त वृक्ष में निवास करता है। बेलपत्र (Belpatra) में माता पार्वती का प्रतिबिंब होने के कारण इसे भगवान शिव पर चढ़ाया जाता है। भगवान शिव पर बेल पत्र चढ़ाने से वे प्रसन्न होते हैं और भक्त की मनोकामना पूर्ण करते हैं। जो व्यक्ति किसी तीर्थस्थान पर नहीं जा सकता है अगर वह श्रावण मास में बिल्व के पेड़ के मूल भाग की पूजा करके उसमें जल अर्पित करे तो उसे सभी तीर्थों के दर्शन का पुण्य मिलता है। प्राकृतिक बेलपत्र न मिलने पर पूजा में चांदी के भी बेलपत्र चढ़ाने का प्रचलन है।


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बेल वृक्ष(Bel tree) के बारे में कुछ रोचक तथ्य

  • बेल वृक्ष(Bel Tree) को काटने से वंश का नाश होता है और बेल वृक्ष लगाने से वंश की वृद्धि होती है।
  • सुबह-शाम बेल वृक्ष (Bel tree) के दर्शन मात्र से पापों का नाश होता है।
  • बेल वृक्ष (Bel Tree) को सींचने से पितर तृप्त होते हैं।
  • बेल वृक्ष (Bel tree) और सफेद आक को जोड़े से लगाने पर अटूट लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।
  • बेलपत्र(Belpatra) और ताम्र धातु के एक विशेष प्रयोग से ऋषि मुनि स्वर्ण धातु का उत्पादन करते थे।
  • शिवलिंग पर बेलपत्र (Belpatra) चढ़ाने से पापों से मुक्ति होती है।
  • बेल वृक्ष (Bel Tree) का रोपण, पोषण और संवर्द्धन करने से महादेव से साक्षात्कार करने का अवश्य लाभ मिलता है।
  • अगर किसी की शवयात्रा बिल्व वृक्ष(Bel Tree) की छाया से होकर गुजरे तो उसका मोक्ष हो जाता है।
  • वायुमंडल में व्याप्त अशुद्धियों को सोखने की क्षमता सबसे ज्यादा बिल्व वृक्ष (Bel tree) में होती है।
  • 4, 5, 6 या 7 पत्तों वाले बिल्व पत्रक(Belpatra) पाने वाला परम भाग्यशाली और शिव को अर्पण करने से अनंत गुना फल मिलता है।

Natural Bel Patra Leaves

belpatra-bael leaves

Belpatra-Why is Belpatra tree considered auspicious

Origin of Belpatra Tree

The Belpatra tree is said to have sprung from a drop of Mother Parvati’s perspiration when it fell on the Mandarachal mountain. The Bel tree arose from Mother Parvati’s perspiration. Mother Parvati resides in all of her forms in it. She resides in the tree as Girija, Maheshwari, Dakshinayani, and Parvati in the root, trunk, branches, and leaves, respectively.

Katyayani lives in fruits, whereas Gauri lives in flowers. The form of Maa Lakshmi, in addition to all these forms, is present in every tree. It is offered to Lord Shiva as a reflection of Mother Parvati in Belpatra. Lord Shiva is pleased and grants the desires of the devotee when bail leaves are offered to him. If a person is unable to visit any pilgrimage site, he can obtain the virtue of visiting all pilgrimages by worshipping the root part of the Bilva tree(Bel tree) in the month of Shravan and offering water to it. In case if natural belpatra leaves are not available, then silver belpatra is also offered to Lord Shiva.

Some interesting facts about Bael tree

  • One’s lineage is destroyed when the Bael tree is cut down, whereas when the Bael tree is planted the lineage flourishes.
  • Simply seeing the Bael tree in the morning and evening obliterates sins.
  • Watering the Bael(Bel) tree appeases the ancestors.
  • Planting the Bael tree with white aak in pair yields limitless wealth.
  • In Ancient times Rishi Munis used to make gold metal by using belpatra with copper metal.
  • One can atone for their misdeeds by presenting Belpatra to the Shivling.
  • Planting, caring, and cultivating the Bael tree provides the opportunity to have vision of Lord Shiva Mahadev.
  • If someone’s funeral procession passes through the shadow of the Bilva tree, then he gets salvation.
  • Bilva tree has maximum capacity to absorb the impurities present in the atmosphere.
  • One who gets a bilva leaf with 4, 5, 6 or 7 leaves is the most fortunate and by offering it to Shiva, one gets manifold results.

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