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बेचारी चिड़िया

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बेचारी चिड़िया

(पुरानी ग्रामीण आँचलिक कहानी)

एक किसान था। उसका एक खेत था। खेत में उसने ज्वार बोई थी। ज्वार में बालें आईं। बालों में दाने पड़े। एक-एक दाना एक-एक मोती का-सा था। एक दिन चिड़ियों ने खेत में दाने चुगने का विचार किया। सब एक साथ खेत में पहुंच गईं। सब नरम-नरम, दूध भरे दाने चुगने लगीं।

इतने में किसान आ पहुंचा और उसने अपना जाल फैला दिया। सब चिड़ियां उड़ गईं। बेचारी एक आंख वाली चिड़िया पीछे रह गई और वह जाल में फंस गई। किसान से उसे पकड़ लिया। एक रस्सी लेकर उसने चिड़िया को खम्बे से बाधं दिया। फिर वह एक बड़ा डण्डा लेने चला गया। डण्डा लेकर लौटा, और चिड़िया को डण्डे से पीटने लगा। बेचारी चिड़िया छटपटाने लगी।

इसी बीच उधर से एक ग्वाला निकला। ग्वाले को देखकर चिड़िया बोली: ओ, गाय वाले भैया, ओ, गाय वाले भैया! एक आंख की मैं चिरैया, बचा लो मुझे भैया!

चिड़िया की आवाज सुनकर ग्वाला खेत पर पहुंचा। उसने देखा कि किसान चिड़िया को डण्डे से पीट रहा है।


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ग्वाला बोला, “भैया! इसे मत पीटो। छोड़ दो। बेचारी एक आंख की तो है।”

किसान ने कहा, “मैं इसको क्यों छोडूं? मैं तो इसको कचहरी में ले जाऊंगा और वहां इसकी शिकायत करूंगा। तुम क्या जानो कि इसने मेरा कितना नुकसान किया है?”

ग्वाला बोला, “भैया! तुम मेरी एक दूध देती गाय ले लो, और इस चिड़िया को छोड़ दो।”

किसान ने कहा, “जाओ-जाओ अपने रास्ते चले जाओ, नहीं तो मैं तुमको भी पीटूंगा।”

ग्वाला अपनी गाएं लेकर चला गया। कुछ देर के बाद उधर से भैंस चराने वाला एक ग्वाला निकला।

उसे देखकर चिड़िया फिर गाने लगी: ओरे भैंस वाले भैया, ओ भैंस वाले भैया! एक आंख की मैं चिरैया, बचा लो मुझे भैया!

खेत पर पहुंचकर ग्वाले ने देखा कि किसान एक चिड़िया को पीट रहा है। ग्वाला बोला, “अरे भैया! इसे छोड़ दो। बेचारी एक आंख की तो है।”

किसान ने कहा, “नहीं, मैं इसे हरगिज नहीं छोडूंगा। इसने मेरा बहुत नुक़सान किया है। मैं इसे कचहरी मे ले जाऊंगा और इसकी शिकायत करूंगा।”

ग्वाला बोला, “भैया! लो, मेरी एक भैंस ले लो, और इस चिड़िया को छोड़ दो।”

किसान ने कहा, ‘जाओ-जाओ अपने रास्ते चले जाओ, नहीं तो मैं तुमको भी पीटूंगा।”

भैंस चराने वाला तो अपनी भैसों के साथ आगे बढ़ गया। फिर वहां एक के बाद एक बकरी चराने वाला, घोड़े चराने वाला और ऊंट चराने वाला पहुंचा। लेकिन किसान ने डांट-डपटकर सबको भगा दिया। बाद में किसान चिड़िया को लेकर कचहरी के लिए रवाना हुए।

बड़ी तेज धूप थी। रास्ते में उसे हैरानी हुई। इसलिए वह एक पेड़ के नीचे जा बैठा। वहां चार गंजेड़ी बैठे थे।

उन्हें देखकर चिड़िया बोली: ओ, गंजेड़ी भैया, ओ, गंजेड़ी भैया! एक आंख की मैं चिरैया, बचा लो मुझे भैया!

चिड़िया का गाना सुनकर गंजेड़ी किसान के पास पहुंचे और बोले, “ओ, किसान के बच्चे! तू इस चिड़िया को छोड़ता है या नहीं?”

किसान ने कहा, “जाओ जाओ, अपने रास्ते चले जाओ। मैं तो इसे कचहरी में ले जाऊंगा।”

गंजेड़ियों को गुस्सा आ गया। बोले, “मारो इसको” और वे किसान को मारने दौड़े। किसान डर गया। उसने चिड़िया को छोड़ दिया। बाद में बेचारी चिड़िया धीमे-धीमे उड़ती हुई अपनी टोली वाली चिड़ियों के दल में जा मिली।

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छोरा गंगा किनारे वाला

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