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श्री रामजी निर्विकार निराकार परम ब्रह्म भगवान हैं|Bhagawan Ram is Nirakar Param Brahm

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Prabhu Shri Ram Omkar

श्री रामजी निराकार भगवान हैं। इसी बात तो समझाने के लिए तुलसीदास ने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे तालाब में कमल बिना किसी प्रकट स्रोत के खिलता है, जो की महान सुंदरता और महान गुणो से युक्त है। जबकि तालाब का कोई रूप नही है है, उसी प्रकार सगुण ब्रह्म का प्राकट्य(अवतार) होता है और निर्विकार ब्रह्म से उनकी सत्ता भिन्न नही है। वह उसी से उद्भभूत और उन्ही का ही रूप हैं।
आगे श्री रामचरितमानस के बाल कांड में दोहा संख्या 118 में, और उसकी पूर्व पंक्तियों में श्री शिवजी, माता पार्वतीजी को समझाते हुए श्रीराम के निर्विकार स्वरूप का इस प्रकार वर्णन करते हैं।

Sri Ram is the Sagun Avatar of Nirakar Brahm. Tulasidasji gives an example of Sagun Brahm like a Lotus in pond. You can see the Lotus which is beautiful and has great attributes and essentially a manifestation in pond water which is formless. Further in Bal Kand of Ramcharit Manas Shivaji explain Parvatiji like this to confirm that Shri Ram is manifestation of same Formless Nirakar Brahm in following Chaupais. The Doha number is 118 in Bal Kand of Ramcharitamanas.

Chaupai :

एहि विधि जग हरि आश्रित रहई । जदपि असत्य देत दुख अहई ।।
जौं सपनें सर काटे कोई। बिनु जागे दूरि दुख ना होई ।।

Ehi vidhi jag Hari Ashrit rahai । Jadapi asatya det dukh ahai ।।
Joun sapane sar kaate koi। Binu jage doori dukh na hoi ।।

अर्थ : यह संसार इस प्रकार श्री हरि भगवान पर निर्भर है। हालाँकि ये संसार झूठ और भ्रम है, फिर भी अपार दुख़ देता है। जैसे किसी का सपने में सिर कट जाए तो उसकी व्यथा तब तक दूर नही होती जब तक कि वो जाग ना जाए।इस संसार के दुख इसी प्रकार से मिथ्या हैं, लेकिन सत्य प्रतीत होते हैं।

Meaning: World is thus always dependent for everything on Hari. Although this world is false, still it gives immense grief.
For example if someone is beheaded in his dream, but his predicament will not be over unless he wakes up.

जासु कृपा अस भ्रम मिटी जाई । गिरिजा सोई कृपाल रघुराई ।।
आदि अंत को जासु ना पावा । मति अनुमानि निगम अस गावा ।।

Jasu kripa as bhrama miti jaai । Girija soi Kripal Raghurai ।।
Adi ant kou jasu na pava । Mati anumani nigam as gawa ।।

अर्थ: इस प्रकार का संसार के मिथ्यज़ाल होने का भ्रम सिर्फ़ निरकार ब्रह्म ही दूर करने मे समर्थ हैं और श्री राम वही कृपालु निर्विकार भगवान हैं।वह वही हैं, जिसके आदि (शुरुआत ) और अंत का किसी को नहीं ज्ञात है। निर्विकार निराकार परम ब्रह्म भगवान के बारे में वेदों ने इस प्रकार वर्णन किया है।

Meaning: The illusion of this world is destroyed by whom, Shri Ram is same gracious Lord. Whose beginning and end cannot be fathomed. Vedas have said thus about the formless Brahm like this.

बिनु पद चलहि, सुनहि बिनु काना। कर बिनु करही करम विधि नाना ।।
आननहीन सकल रस भोगी । बिनु बानी वक्ता बड़ जोगी।।

Binu pad chalahi, sunahi binu kana। Kar binu karahi karam vidhi nana ।।
Ananheen sakal ras bhogi । Binu bani vakta bad jogi।।

अर्थ: (निर्विकार निराकार परम ब्रह्म भगवान) बिना पैरों के ही चलते हैं, और बिना हाथों के ही सभी प्रकार के कार्य करते हैं। बिना मुख के ही सब रसों का स्वाद उन्हे पता है और बिना बोले ही सबसे बड़े वक्ता हैं।

Meaning:  One who walks without foot and without hands also he is performing all kinds of tasks as he is formless Brahm. He is without face but knows the taste of everything. and without voice also he is great orator.

तन बिनु परस, नयन बिनु देखा। ग्रहहि घ्राण बिनु बास अशेषा।।
एहि विधि सब अलौकिक करनी। महिमा अमित जिमी जाई न बरनि ।।

Tan binu paras, nayan binu dekha। grahahi ghran binu baas ashesha।।
Ehi vidhi sab alaukik karani। Mahima amit jimi jai na barani ।।

अर्थ: (निर्विकार निराकार परम ब्रह्म भगवान) बिना शरीर के ही सबको स्पर्श करते हैं और बिना नेत्रों के ही सब देखते हैं। बिना नासिका के ही सब प्रकार के गंधों को पहचानते हैं। इस प्रकार से उनकी सब लीला , सभी प्रकार के कार्य अलौकिक हैं। लोगों की समझ से उपर हैं. जिनकी महिमा का विस्तार अपार है और इस कारण से कही नही जा सकती।

Meaning: He is without body or any from yet he touches everyone.Without eyes he sees everything Without nose also he scan smell everything. Thus Formless Brahm is like this whose fathomless greatness cannot be told .

दोहा- एहि विधि बरनहि वेद बुध , जाहि धरही मुनि ध्यान।।
सोई दशरथ सुत भगत हित कोशलपति भगवान।।

Doha- Ehi Vidhi baranhi Ved Budh, Jahi dharahi Muni dhyan।।
Soi Dasharath sut Bhagat hit Koshalpati Bhagwan।।

Meaning: Vedas and Learned seers have told like this about the Formless Brahm , Shri Ram, The Son of Dasharath is same Param Brahm who has manifested for the goodness of devotees.

अर्थ : इस प्रकार से जिस निर्विकार निराकार परम ब्रह्म भगवान का वर्णन वेदों ने और बुद्धिमान मनीषी यों ने किया है और मुनि जिनका ध्यान करते हैं , उन्ही निर्विकार निराकार परम ब्रह्म भगवान ने श्री राम होकर दशरथ के पुत्र के रूप में भक्तों के कल्याण के लिए कोशलपति होकर अवतार लिया है।

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  1. Shodashopachar Pooja Procedure
  2. Shri Ram Chalisas by Sant Haridas & Sundardas
  3. Ramrakshastrot by Buhdkaushik Rishi
  4. Shri Ram Stuti done by Bhagwan Shiva
  5. Shri Ramchandra Kripalu Bhajman Aarti
  6. Also All Hymns: Only Transliteration & Hindi-Roman Text (For distraction-free recitation during Pooja)

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