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पुषाण मुद्रा – Pushan Mudra

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पुषाण मुद्रा सूर्य देवता को समर्पित होने के कारण इसका सीधा प्रभाव मणिपुर चक्र पर पड़ता है

Table of Contents

पुषाण मुद्रा बनाने के लिए तीन अलग-अलग मुद्राओं का प्रयोग किया जाता है। पुषाण मुद्रा लगाने की दो विधियां हैं।

पुषाण मुद्रा (Pushan Mudra)

 

pushan mudra

पुषाण मुद्रा (Pushan Mudra)

 

 

पहली विधि

दाएं हाथ से व्यान मुद्रा बनाएं अर्थात तर्जनी और मध्यमा अंगुली के अग्र भाग को अंगूठे के अग्र भाग से मिलाएं और बाकी अंगुलिया सीधी रखें। बाएं हाथ से अपान मुद्रा बनाएं अर्थात मध्यमा अंगुली और अनामिका अंगुली के अग्र भाग को अंगूठे के अग्र भाग से मिलाएं और बाकी की अंगुलियां सीधी रखें।

दूसरी विधि

दाएं हाथ से प्राण मुद्रा बनाएं अर्थात छोटा अंगुली और अनामिका अंगुली के अग्र भाग को अंगूठे के अग्र भाग से मिलाएं और बाकी की अंग़ुलियां सीधी रखें। बाएं हाथ से अपान मुद्रा बनाएं अर्थात मध्यमा अंगुली और अनामिका अंगुली के अग्र भाग को अंगूठे के अग्र भाग से मिलाएं और बाकी की अंगुलियां सीधी रखें।

इन दोनों विधियोँ में बाएं हाथ से केवल अपान मुद्रा ही बनानी है।पुषाण मुद्रा सूर्य देवता को समर्पित होने के कारण इसका सीधा प्रभाव मणिपुर चक्र पर पड़ता है क्योंकि मणिपुर चक्र का सीधा सम्बन्ध सूर्य से है। इसी कारण मणिपुर चक्र हमारे शरीर में जठराग्नि प्रज्जवलित करता है।

लाभ : पुषाण मुद्रा की पहली विधि में व्यान मुद्रा और अपान मुद्रा के लाभ प्राप्त होते हैं और दूसरी विधि में प्राण मुद्रा और अपान मुद्रा के लाभ प्राप्त होते हैं।

संक्षेप में:–

  1. व्यान मुद्रा ह्रदय रोग और उच्च रक्त चाप से बचाती है।
  2. अपान मुद्रा  मूत्र प्रणाली तथा मल-विसर्जन प्रणाली को ठीक रखती है।
  3. प्राण मुद्रा शरीर की सोई हुई शक्तियों को जागृत करती है, रक्त संचार ठीक रखती है तथा शक्तिवान बनाती है।
  4. एक साथ दो मुद्राएं बनाने से (व्यान और अपान) गैंस, पेट में भारीपन, उल्टी, मिचली आदि की समस्या दूर होती हैं।
  5. दूसरी दो मुद्राएं एक साथ बनाने से प्राण मुद्रा और अपान मुद्रा लगाने से मणिपुर चक्र शक्तिशाली होता है और वहाँ से उत्पन्न हुई उर्जा सारे शरीर में फैल जाती है। यादाश्त बढ़ जाती है और शरीर के प्रत्येक अंग में नईं चेतना जागृत होती है।

Pushan Mudra is dedicated to lord Sun.Sun,deity of new hope and beginning, also a GOD of nourishment and fulfillment. This is mudra of nourishment and digestion.In most of the mudras, fingers of both hands are held in similar way. but in this mudra two hands will have different formation with the fingers, as discribed below:

Left hand posture of Pushan Mudra Join the tip of index finger, middle finger and thumb together All other fingers should be stretched straight.

Right Hand posture of Pushan Mudra Join the tips of middle , ring fingers with the thumb and put slightest pressure.  All other fingers should be stretched striaght.

The above gesture symobilises the accepting by one hand and then giving by the other hand. This mudra is very powerful and can influences the energy chakras that are responsible for absorbing and utilizing food, and helping with elimination as well.

 This mudra improve digestion. It is highly beneficial for metabolism.  It intensifies the breathing process and hence helps in absorption of oxygen and release of carbon dioxide in the lungs. It provide relaxing effect on the area of the stomach, liver and gallbladder It is very beneficial in nausea, flatulence, and feeling of fullness after meals.This mudra should be practiced 4 times a day for 5 min each to have immediate effect.

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