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श्री रामदेव चालीसा-2

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श्री रामदेव चालीसा-2

॥दोहा॥


जय जय जय प्रभु रामदेव, नमो नमो हर बार ।
लाज रखो आप भक्त की, हरो पाप का भार ।

दीन बंधु किरपा करो, मोर हरो संताप ।
स्वामी तीनों लोक के, हरो क्लेश और पाप ।

॥चौपाई॥

जय जय रामदेव जय कारी । विपदा हरो आप आन हमारी ।।
आप हो सुख सम्पत्ति के दाता । भक्त जनों के भाग्य विधाता ।।

बाल रूप अजमल के धारा । बनकर पुत्र सभी दु:ख टारा ।।
दुखियाे के आप हो रखवाले । लागत आप उन्हीं को प्यारे ।।


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आपही रामदेव प्रभु स्वामी । घट घट के हो अन्तर्यामी ।।
आप हो भक्तों के भयहारी । मेरी भी सुध लो अवतारी ।।

जग मे नाम तुम्हारा भारी । भजते घर घर सब नर-नारी ।।
दु:ख भंजन है नाम तुम्हारा । जानत आज सकल संसारा ।।

सुन्दर धाम रूणेचा स्वामी । आप हो जग के अन्तर्यामी ।।
कलयुग मे प्रभुजी आप पधारे । अंश एक पर नाम है न्यारे ।।

आप हो भक्तजनो के रक्षक। पापी दुष्ट जनो के भक्षक।।
सोहे हाथ आपके भाला । गले मे सोहे सुन्दर माला ।।

आप सुशोभित अश्व असवारी । करो किरपा मुझ पर अवतारी ।।
नाम तुम्हारा ग्यान प्रकाशे । पाप अविधा सब दु:ख नाशे ।।

आप भक्तों के भक्त तुम्हारे । नित्य बसो प्रभुजी ह्रदय हमारे ।।
लीला अपरम्पार तुम्हारी । सुख दाता भव भंजन हारी ।।

निबुद्धि भी विधा पावे । रोगी रोग बिना हो जावे ।।
पुत्रहीन
सुसन्तान पावे । सुयश ग्यान करि मोद मनावे ।।

दुर्जन दुष्ट निकट नहीं आवे । भूत पिशाच सभी डर जावे ।।
जो कोई पुत्र हीन नर ध्यावे । निश्चय ही वो नर सुत पावे ।।

आपने डुबत नाव उबारी । नमक किया मिश्री को सारी ।।
पीरो को परचा आप दिना । नीर सरोवर खारा किना ।।

आपने पुत्र दिया दलजी को । ग्यान दिया आपने हरजी को ।।
सुगणा का दु:ख आप हरलीना । पुत्र मरा सरजीवन किना ।।

जो कोई आपको सुमरन करते । उनके हित पग आगे धरते ।।
जो कोई टेर लगता तेरी । करते बापजी तनिक ना देरी ।।

विविध रूप धर भैरव मारा । जांभाजी को परचा दे डाला ।।
जो कोई शरण आपरे आवे । मन इच्छा पूर्ण हो जावे ।।

नयन हिन के तुम रखवारे । कोढी पांगलो के दु:ख टारे ।।
नित्य पढें चालीसा कोई । सुख सम्पत्ति वाके घर होई ।।

जो कोई भक्ति भाव से ध्याते । मन वांछित फल वो नर पाते ।।
मैं भी सेवक हूं प्रभुजी तेरा । काटो जन्म मरण का फैरा ।।

जय जयहो प्रभु लीला तेरी । पार करो प्रभुजी नैया मेरी ।।
करता भक्त विनय प्रभुजी तेरी । करहूं नाथ आप मम उर डेरी ।।

॥दोहा॥

भक्त समझ किरपा करो नाथ पधारो दौड़ ।
विनती है प्रभू आपसे भक्त करे कर जोड़ ।।

यह चालीसा नित्य उठ पाठ करे जो कोय ।
मन वांछित फल पाय वो सुख सम्पत्ति घर होय ।।

बोलो श्री रामदेव जी महाराज री जय
बाबा श्री रामदेव जी महाराज री जय
प्रभुजी श्री रामदेव जी महाराज री जय 

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