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गुरुकृपा प्राप्ति के लिए श्री गुरु चालीसा |Shri Guru Chalisa

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गुरु चालीसा (Guru Chalisa) गुरु के श्री चरणों में सप्रेम वंदन है। भक्तिपूर्ण रचना है। तन्मय होके नित्य इसका पाठ कीजिये और अपने अंतर के गुरु से तारतम्य स्थापित कीजिये। एक दिन आपके गुरु अवश्य आपकी पुकार सुनेंगे।

गुरु चालीसा का महत्व – Significance of Guru Chalisa

गुरु चालीसा का पाठ करने से सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है। श्री गुरुदेव चालीसा की कृपा से सिद्धि-बुद्धि,धन-बल और ज्ञान-विवेक की प्राप्ति होती है। गुरु चालीसा के प्रभाव से व्यक्ति धनी बनता है, वो तरक्की करता है। वो हर तरह के सुख का भागीदार बनता है, उसे कष्ट नहीं होता। गुरु की कृपा मात्र से ही व्यक्ति सारी तकलीफों से दूर हो जाता है और वो तेजस्वी बनता है। गुरु चालीसा का पाठ जीवन में सुख-सौभाग्य लाता है। गुरु कृपा से बुद्धि शुद्ध होती है, विवेक और ज्ञान बढ़ता है। जीवन में चहुँ ओर सामंजस्य आता है, सुख-समृद्धि आती है। जीवन का कष्ट घटता है और खुशहाली आती है। व्यक्ति तेज़ और ओज से युक्त होने लगता है। सांसारिक लाभ के साथ साथ आध्यात्मिक उन्नति भी होतो है।

श्री गुरु चालीसा
Shri Guru Chalisa Lyrics in Hindi

दोहा ॥

ॐ नमो गुरुदेव जी, सबके सरजनहार।
व्यापक अंतर बाहर में, पारब्रह्म करतार॥
देवन के भी देव हो , सिमरूं मैं बारम्बार।
आपकी कृपा बिना, होवे न भव से पार॥


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ऋषि मुनि सब संत जन, जापे तुम्हारा जाप।
आत्मज्ञान घाट पाय के, निर्भय हो गए आप॥
गुरु चालीसा जो पढ़ें, उर गुरु ध्यान लगाय।
जन्म-मरण भव दुःख मिटे, काल कबहुँ नहीं खाय॥

गुरु चालीसा पढ़े-सुने, रिद्धि-सिद्धि सुख पाय।
मन वांछित कारज सरें, जन्म सफल हो जाय॥

॥ चौपाई ॥

ॐ नमो गुरुदेव दयाला, भक्तजनों के हो प्रतिपाला ।
पर उपकार धरो अवतारा, डूबत जग में हंस उबारा ।
तेरा दरश करें बड़भागी, जिनकी लगन हरि से लागी ।
नाम जहाज तेरा सुखदाई, धारे जीव पार हो जाई ॥

पारब्रह्म गुरु हैं अविनाशी, शुद्ध स्वरूप सदा सुखराशी ।
गुरु समान दाता कोई नाहीं, राजा प्रजा सब आस लगायी ।
गुरु सन्मुख जब जीव हो जावे, कोटि कल्प के पाप नसावे ।
जिन पर कृपा गुरु की होई, उनको कमी रहे नहीं कोई ।

हिरदय में गुरुदेव को धारे, गुरु उसका हैं जन्म सँवारें ।
रामलखन गुरु सेवा जानी, विश्व-विजयी हुए महाज्ञानी ।
कृष्ण गुरु की आज्ञा धारी, स्वयं जो पारब्रह्म अवतारी ।
सद्गुरु कृपा अति है भारी, नारद की चौरासी टारी ।

कठिन तपस्या करें शुकदेव, गुरु बिना नहीं पाया भेद ।
गुरु मिले जब जनक विदेही, आतमज्ञान महा सुख लेही ।
व्यास, वसिष्ठ मर्म गुरु जानी, सकल शास्त्र के भये अति ज्ञानी ।
अनंत ऋषि मुनि अवतारा, सद्गुरु चरण-कमल चित धारा ।

सद्गुरु नाम जो हृदय धारे, कोटि कल्प के पाप निवारे ।
सद्गुरु सेवा उर में धारे, इक्कीस पीढ़ी अपनी वो तारे ।
पूर्वजन्म की तपस्या जागे, गुरु सेवा में तब मन लागे ।

सद्गुरु-सेवा सब सुख होवे, जनम अकारथ क्यों है खोवे ।
सद्गुरु सेवा बिरला जाने, मूरख बात नहीं पहिचाने ।
सद्गुरु नाम जपो दिन-राती, जन्म-जन्म का है यह साथी।
अन्न-धन लक्ष्मी जो सुख चाहे, गुरु सेवा में ध्यान लगावे ।

गुरुकृपा सब विघ्न विनाशी, मिटे भरम आतम परकाशी ।
पूर्व पुण्य उदय सब होवे, मन अपना सद्गुरु में खोवे ।
गुरु सेवा में विघ्न पड़ावे, उनका कुल नरकों में जावे ।
गुरु सेवा से विमुख जो रहता, यम की मार सदा वह सहता ।

गुरु विमुख भोगे दुःख भारी, परमारथ का नहीं अधिकारी ।
गुरु विमुख को नरक न ठौर, बातें करो चाहे लाख करोड़ ।
गुरु का द्रोही सबसे बूरा, उसका काम होवे नहीं पूरा ।
जो सद्गुरु का लेवे नाम, वो ही पावे अचल आराम ॥

सभी संत नाम से तरिया, निगुरा नाम बिना ही मरिया ।
यम का दूत दूर ही भागे, जिसका मन सद्गुरु में लागे ।
भूत, पिशाच निकट नहीं आवे, गुरुमंत्र जो निशदिन ध्यावे ।
जो सद्गुरु की सेवा करते, डाकन-शाकन सब हैं डरते ॥

जंतर-मंतर, जादू-टोना, गुरु भक्त के कुछ नहीं होना ।
गुरू भक्त की महिमा भारी, क्या समझे निगुरा नर-नारी ।
गुरु भक्त पर सद्गुरु बूठे, धरमराज का लेखा छूटे ।
गुरु भक्त निज रूप ही चाहे, गुरु मार्ग से लक्ष्य को पावे ।
गुरु भक्त सबके सिर ताज, उनका सब देवों पर राज ।

दोहा

यह सद्गुरु चालीसा, पढ़े सुने चित्त लाय ।
अंतर ज्ञान प्रकाश हो, दरिद्रता दुःख जाय ॥
गुरु महिमा बेअंत है, गुरु हैं परम दयाल ।
साधक मन आनंद करे, गुरुवर करें निहाल।

॥इति श्री गुरु चालीसा (Guru Chalisa) समाप्त॥

श्री गुरु महिमा का रहस्योद्घाटन करती गुरु चालीसा
Shri Guru Mahima

श्री गुरु चालीसा (Guru Chalisa) गुरु के महिमा उजागर करने के लिए रचित स्त्रोत है। पर क्या गुरु की महिमा केवल चालीस पदों में सीमित हो सकती है ? नहीं। गुरु की महिमा अनंत हैं। शिष्य के आध्यात्मिक यात्रा के जन्म-जन्मांतर के साक्षी होते हैं गुरुदेव। निरन्तर आपकी आध्यात्मिक प्रगति पर नजर बनाये हुए भी कई जन्मो के बाद जब आपके पुण्य उदय होते हैं तब उचित समय पर उनका दर्शन और मार्गदर्शन प्राप्त होता है।

गुरु अगर शिष्य की रक्षा के लिए उद्धत हो जाए तो मृत्यु को भी पीछे हटना पड़ सकता है। गुरु आपकी आत्मा के अनंत यात्रा में आपके आध्यात्मिक पिता के सामान होते हैं। आपके शरीर के इस जन्म के माता-पिता का साथ मृत्यु के बाद भले ही छूट जाए परन्तु गुरुदेव से सम्बन्ध जन्मान्तरों तक रहता है।

कहा भी गया है ‘गुरुर्विना गतिर्नास्ति ‘ अर्थात गुरु के बिना सद्गति नहीं होती। गुरु शिष्य परंपरा के रक्षक साक्षात् भगवान शिवजी है। रामचरितमानस के उत्तर कांड में आता है कि जब मानव शरीरधारी काकभुशुण्डि ने गुरु की उपेक्षा की तो भगवान शिव ने तुरंत उन्हें श्राप दिया। फिर उनके श्री गुरु के प्रार्थना पर ही उनका उद्धार हुआ।

कबीर दास जी ने भी कहा है ‘गुरु गोविन्द दोउ खड़े काके लागूं पाँव , बलिहारी गुरु आपने गोविन्द दियो बताय।’ अर्थात गुरु और भगवान दोनों सामने खड़े हो तो भी मैं गुरु के ही पाँव पहले पडूंगा क्योंकि गुरु की ईश्वर कि पहचान कर बताते हैं कि इनको प्रथम प्रणाम करो।

निम्नांकित जगत्प्रसिद्ध गुरु-स्तुति ने तो मानो पूर्ण सत्य का ही उद्घाटन कर दिया है ,

गुरुर्ब्रह्मा गुर्विष्णुः गुरुर्देवोमहेश्वराय।
गुरुर्साक्षात परब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नमः॥
यहाँ ब्रह्मा, विष्णु ,महेश सहित श्री गुरुदेव की तुलना साक्षात् निरकार निर्गुण परब्रह्म तक से कर दी गयी है।

श्री गुरुदेव चालीसा|Shri Guru Chalisa in Hindi

Shri Guru Chalisa in English Roman Script

॥Doha॥

Aum namo gurudev jī, sabake sarajanahāra।
Vyāpak aantar bāhar mean, pārabrahma karatāra॥
Devan ke bhī dev ho , simarūan maian bārambāra।
Āpakī kṛupā binā, hove n bhav se pāra॥

Ṛuṣhi muni sab santa jana, jāpe tumhārā jāpa।
Ātmajnyān ghāṭ pāya ke, nirbhaya ho gae āpa॥
Guru chālīsā jo paढ़ean, ur guru dhyān lagāya।
Janma-maraṇ bhav duahkha miṭe, kāl kabahu nahīan khāya॥

Guru chālīsā paḍhae-sune, riddhi-siddhi sukh pāya।
Man vāanchhit kāraj sarean, janma safal ho jāya॥

॥Chaupai॥

Aum namo gurudev dayālā, bhaktajanoan ke ho pratipālā ।
Par upakār dharo avatārā, ḍūbat jag mean hansa ubārā ।
Terā darash karean baḍabhāgī, jinakī lagan hari se lāgī ।
Nām jahāj terā sukhadāī, dhāre jīv pār ho jāī ॥

Pārabrahma guru haian avināshī, shuddha svarūp sadā sukharāshī ।
Guru samān dātā koī nāhīan, rājā prajā sab ās lagāyī ।
Guru sanmukh jab jīv ho jāve, koṭi kalpa ke pāp nasāve ।
Jin par kṛupā guru kī hoī, unako kamī rahe nahīan koī ।

Hiradaya mean gurudev ko dhāre, guru usakā haian janma savārean ।
Rāma-lakhan guru sevā jānī, vishva-vijayī hue mahājnyānī ।
Kṛuṣhṇa guru kī ājnyā dhārī, svayan jo pārabrahma avatārī ।
Sadguru kṛupā ati hai bhārī, nārad kī chaurāsī ṭārī ।

Kaṭhin tapasyā karean shukadeva, guru binā nahīan pāyā bhed ।
Guru mile jab janak videhī, ātamajnyān mahā sukh lehī ।
Vyāsa, vasiṣhṭha marma guru jānī, sakal shāstra ke bhaye ati jnyānī ।
Ananta ṛuṣhi muni avatārā, sadguru charaṇa-kamal chit dhārā ।

Sadguru nām jo hṛudaya dhāre, koṭi kalpa ke pāp nivāre ।
Sadguru sevā ur mean dhāre, ikkīs pīḍhaī apanī vo tāre ।
Pūrvajanma kī tapasyā jāge, guru sevā mean tab man lāge ।

Sadguru-sevā sab sukh hove, janam akārath kyoan hai khove ।
Sadguru sevā biralā jāne, mūrakh bāt nahīan pahichāne ।
Sadguru nām japo dina-rātī, janma-janma kā hai yah sāthī।
Anna-dhan lakṣhmī jo sukh chāhe, guru sevā mean dhyān lagāve ।

Gurukṛupā sab vighna vināshī, miṭe bharam ātam parakāshī ।
Pūrva puṇya udaya sab hove, man apanā sadguru mean khove ।
Guru sevā mean vighna paḍaāve, unakā kul narakoan mean jāve ।
Guru sevā se vimukh jo rahatā, yam kī mār sadā vah sahatā ।

Guru vimukh bhoge duahkha bhārī, paramārath kā nahīan adhikārī ।
Guru vimukh ko narak n ṭhaura, bātean karo chāhe lākh karoḍa ।
Guru kā drohī sabase būrā, usakā kām hove nahīan pūrā ।
Jo sadguru kā leve nāma, vo hī pāve achal ārām ॥

Sabhī santa nām se tariyā, nigurā nām binā hī mariyā ।
Yam kā dūt dūr hī bhāge, jisakā man sadguru mean lāge ।
Bhūta, pishāch nikaṭ nahīan āve, gurumantra jo nishadin dhyāve ।
Jo sadguru kī sevā karate, ḍākana-shākan sab haian ḍarate ॥

Jantara-mantara, jādū-ṭonā, guru bhakta ke kuchh nahīan honā ।
Gurū bhakta kī mahimā bhārī, kyā samaze nigurā nara-nārī ।
Guru bhakta par sadguru būṭhe, dharamarāj kā lekhā chhūṭe ।
Guru bhakta nij rūp hī chāhe, guru mārga se lakṣhya ko pāve ।
Guru bhakta sabake sir tāja, unakā sab devoan par rāj ।

।।Doha।।

Yah sadguru chālīsā, paḍhae sune chitta lāya ।
Aantar jnyān prakāsh ho, daridratā duahkha jāya ॥
Guru mahimā beaanta hai, guru haian param dayāl ।
Sādhak man ānanda kare, guruvar karean nihāla।

॥Thus Shri Guru Chalisa Completes॥

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