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श्री ज्वाला माता जी की आरती

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श्री ज्वाला माता जी की आरती

आरती जय ज्वाला रानी

जय ज्वाला रानी जय ज्वाला रानी |
प्रगटी पर्वत उपर कलयुग कल्याणी ||

सती लो की जिह्वा में गिर अधभूत तेज दिया |
नो ज्योति फिर प्रगटी शुभ स्थान लिया||

काली लक्ष्मी सरस्वती ज्वाला ज्योति बड़ी |
हिंगलाज अंनपूर्णा चंदड़ी बीच खड़ी ||

बिन दीपक बिन बाती पर्वत जोत जले |
जो पूजे साधक बन संकट आप टले ||


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चंद्रहास राजा ने शुभ निर्माण किया |
गोरखनाथ गुरु को आदर मान दिया ||

ज्योति सभी बुझाने अकबर आया था |
क्षमा मांगकर तुमसे छत्र चढ़ाया था ||

शैय्या भवन है सुंदर माँ को अति भावे |
बार-बार दर्शन को है माँ मन चहावे ||

पान-सुपारी पेड़ा दूध चड़े जवाला |
शक्ति पीठ को पूजे हाथ लिए माला ||

करे जागरण सेवक प्रेम लिए मन में |
ऐसा ‘ओम’ आकर्षण तेरे दर्शन में ||

।।इति श्री ज्वाला माता जी आरती समाप्त।।

Shri Jwala Mata ji Aarti in English Text

Jay Jwaala Raani Jay Jwaala Raani |
Pragati parvat upar kalayug kalyaani ||

Sati lo ki jihva mein gir adhabhoot tej diya |
No jyoti phir pragati shubh sthaan liya||

Kaali Lakshmi Sarasvati Jwaala jyoti badi |
Hingalaaj Annapoorna Chandari beech khadi ||

Bin deepak bin baati parvat jot jale |
Jo pooje saadhak ban sankat aap tale ||

Chandrahaas raaja ne shubh nirmaan kiya |
Gorakhanaath guru ko aadar maan diya ||

Jyoti sabhi bujhaane akabar aaya tha |
Kshama maangakar tumase chhatr chadhaaya tha ||

Shaiyya bhavan hai sundar maan ko ati bhaave |
Baar-baar darshan ko hai Maa man chaahave ||

Paan-supaari peda doodh chade Jwaala |
Shakti peeth ko pooje haath liye maala ||

Kare jaagaran sevak prem liye man mein |
Aisa ‘Om’ aakarshan tere darshan mein ||

।।Thus Shri Jwala Mata ji Arati Ends।।

 शचि स्कन्दपुराण के पुलोमा पुत्री शचि का भी वेदों में उल्लेख मिलता है। स्कन्दपुराण के अनुसार सतयुग में दैत्यराज पुलोम की पुत्री शचि ने देवराज इन्द्र को पति रूप में प्राप्त करने के लिए ज्वालपाधाम में हिमालय की अधिष्ठात्री देवी पार्वती की तपस्या की थी। मां पार्वती ने शची की तपस्या पर प्रसन्न होकर उसे दीप्त ज्वालेश्वरी के रूप में दर्शन दिये और शची की मनोकामना पूर्ण की। जहां मां ने दर्शन दिए थे वही स्थान उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र स्थित ज्वालादेवी का  मंदिर है।
Maa Jwala Devi

1.चालीसा संग्रह -९०+ चालीसायें
2.आरती संग्रह -१००+ आरतियाँ

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