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Station ki Chidiya (स्टेशन की चिड़िया)

स्टेशन पर बैठी एक चिड़िया दूर गाँव में, कभी नीरव ठांव में, जाती उड़-उड़ कर, अपने बच्चों को दाना लाने, ठुमक-ठुमक कर, कभी फुदक-फुदक कर, करती थी सीनाजोरी, बाकी चिड़ियों से, Booking.com थी नन्ही सी, पर आत्मविश्वास प्रखर था, मातृत्व का आवेग सबल था, रेल की पटरियाँ थी मूक साक्षी उसके अविरल संघर्ष की, नही … Continue reading Station ki Chidiya (स्टेशन की चिड़िया)

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