हनुमान जी हर वर्ष राम नवमी के अवसर पर अयोध्या में सरयू नदी के तट पर आते हैं|

एक बार द्वापर युग में नारद मुनि हनुमान जी की परीक्षा लेना चाहते थे| वो हनुमान जी को जाके बताते हैं कि भगवान श्री राम अब श्री कृष्ण रूप में द्वारका में हैं| तो हनुमान जी को जाके प्रभु के दर्शन कारण चाहिए| हनुमान जी उत्तर देते हैं कि वो तभी जाएँगे जब, प्रभु की आज्ञा होगी|

हनुमान जी बताते हैं कि अगले दिन राम नवमी के अवसर पर वो अयोध्या में सरयू नदी के ता पर भोजन वितरण करेंगे | ये उनका हर वर्ष का नियम है|

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प्रभु सब जानते हुए भी नारद जी कहने पर रूप बदल के अयोध्या में हनुमान जी के पास जाते हैं| भोजन कर रहे लोगों के बीच में साधारण मनुष्य का रूप बना के बैठ जाते हैं| हनुमान जी भोजन परोसते परोसते प्रभु के चरणों को देखते ही पहचान जाते हैं, और नारद जी का अहंकार टूट जाता है|

भला परम भक्त हनुमान जी, जो हमेशा प्रभु श्री राम के चरणों का स्मरण करते रहते हैं , कैसे ना भगवान के चरणों को पहचानेंगे| भक्त का मन तो प्रभु के चरणों में ही लगा रहता है|

और मैं इसलिए प्रसन्न हूँ कि आज भी हनुमान जी हर साल हनुमान जी अयोध्या में सरयू नदी के तट पर रामनवमी पर वेश बदल कर जाते हैं| अगर सभी पूज्य जनो के चरण छुयेंगे तो हनुमान जी के चरणों  को भी छू ही लेंगे | बस इसी बात से मन प्रसन्न है |

 

 

 

 

 

 

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